हिमाचल दस्तक : ललित ठाकुर । पधर:  पधर उपमंडल के चौहारघाटी के देवाधिदेव हुरंग नारायण के मूल मंदिर हुरंग में हर चार वर्ष बाद पांचवे वर्ष में प्रवेश कर मनाए जाने वाला काहिका उत्सव इस बार पचीस से 27 जुलाई तक मनाया जाएगा।

यह काहिका उपमंडल पधर में दो स्थानों में मनाया जाता है । जिनमे मूल स्थान हुरंग में ओर दूसरा सियुन पंचायत के सुराहन गांव में मनाया जाता है । यह काहिका उत्सव हर पांच वर्ष के प्रवेश पर मनाया जाता है । आपको बता दे कि काहिका उत्सव में दूर दूर लोग अपने पापो का निवारण करने के लिए आते है । इस काहिका उत्सव में नौड जाती केे लोग अभद्र भाषा का उपयोग कर बुरी शक्तियों को भगाते है ।

इस दौरान काहिका उत्सव के शुभारंभ पर पचीस जुलाई को मुरगण उत्सव का आयोजन होगा। जिसमे ज्येष्ठ नौड को धरती पर दफनाया जाता है और उसकी अर्थी सजा कर पूरे मन्दिर में घुमाया जाता है उसके बाद दैवीय शक्ति से नौड जिंदा होता है । बताया जाता है कि अगर नौड दैवीय शक्ति से जिंदा न हो तो देवता की सारी सम्पति नौड के परिवार को दी जाती है । जबकि छब्बीस जुलाई को काहिका मेला मनाया जाएगा। सत्ताईस जुलाई को मेले का समापन होगा।

काहिका उत्सव संपन करवाने में जोगिंदर नगर उपमंडल के हराबाग के नड़ परिवार की विशेष भूमिका रहती है। देव कारदार समिति अध्यक्ष लेख राम ठाकुर ने बताया कि काहिका उत्सव में देवाधिदेव हुरंग नारायण सहित देव कढोंनी नारायण, देव पशाकोट, देव पेखरू गहरी, तरेलु गहरी, दृण गहरी, सिलह गहरी और कपलधार गहरी सहित कुल आठ देवता शामिल होंगे।  घाटी में मनाए जाने वाले तीन दिवसीय काहिका मेला में प्रदेश भर से हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

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