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To the state in the blind street of debt

नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्रिहोत्री ने गिनाईं बजट की कमियां, बोले-नाकामी छिपाने को बुना विदेशी फंडिंग का जाल, कर्जा मुक्त राज्य का नारा देने वाले छाती ठोंक के लोन ले रहे

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : 9 फरवरी को पेश मुख्यमंत्री के बजट भाषण पर चर्चा की शुरुआत सोमवार को नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्रिहोत्री ने की। उन्होंने बढ़ते कर्ज को ढाल बनाकर न केवल सत्तापक्ष को छलनी किया, बल्कि बजट डॉक्यूमेंट की खामियां भी एक एक कर सामने रखीं।

मुकेश अग्रिहोत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने पहले बजट में कहा था कि पूर्व कांग्रेस सरकारें कर्ज लेकर घी पीती रहीं। अपने विजन डॉक्यूमेंट में कहा था, कर्ज मुक्त राज्य हमारा ध्येय है, लेकिन अब बजट में बोल दिया कि 5 हजार करोड़ से ज्यादा के कर्ज लेंगे। यह बजट प्रदेश को कर्ज की अंधी गली में धकेलने वाला है। अग्रिहोत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बजट डॉक्यूमेंट में कुल बजट की राशि ही नहीं बताई। प्रेसवार्ता में बोले 44387 करोड़ का बजट है। कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर कितना खर्च होगा? यह आंकड़ा भी छिपा लिया। प्रेसवार्ता में सीएम ने कहा कि वे 15 नई स्कीमें लाए हैं, जबकि वित्त विभाग की सूची 18 योजनाएं बता रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इन स्कीमों का बेशक कुछ हो न हो, लेकिन प्रदेश के लोग आपको जरूरी स्कीमी मुख्यमंत्री का दर्जा दे देंगे। ऐसा लगता है कि बजट बनाती बार अफसरों ने मुख्यमंत्री को गुमराह कर दिया है। हमारा जीएसटी कलेक्शन बेहद खराब है। सरकार खुद कह रही है कि फल और कृषि उत्पादन गिरा है। फिर बजट यह भी नहीं बता रहा कि संसाधन कहां से आएंगे? सिर्फ एक बात साफ है कि जो घाटा है, उसे लोन लेकर पूरा करेंगे? मुकेश ने कहा कि पिछले बजट की 30 घोषणाओं पर सरकार को श्वेत पत्र जारी करना चाहिए कि उनका क्या हुआ और कितने लोगों को लाभ मिला? इस बजट से उन सभी को गायब कर दिया गया।

नए फोरलेन और एनएच को भी मुख्यमंत्री भूल गए। मुकेश अग्रिहोत्री ने नए बोर्ड निगमों के गठन पर भी सरकार को आड़े हाथ लिया। यह भी कहा कि 10 फीसदी आरक्षण पर भी सरकार झूठ बोल रही है, जबकि कैबिनेट में इसका दायरा कम करने की कोशिश हुई थी।

एनपीएस पर चुप रहे वाटरगार्ड से दगा किया

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वाटरगार्ड के लिए सीएम और मंत्री दोनों ने पॉलिसी का आश्वासन उनकी रैली में दिया था, लेकिन बजट में भूल गए। अनुबंध कर्मियों की बात नहीं सुनी। एनपीएस कर्मचारियों की मांगों पर भी विचार नहीं किया। सत्तापक्ष से किसी ने कहा कि एनपीएस तो कांग्रेस सरकार लाई थी। मुकेश ने जवाब दिया कि अब तो शिमला नगर निगम से दिल्ली तक आप ही हो, ओपीएस क्यों नहीं लागू करते।

मंडी का सीएम बनाम मंडी का जमाई

मुकेश अग्रिहोत्री ने जब यह सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री जी आपके बजट में मंडी ही दिख रहा है। शिव धाम मंडी में, ब्यास नदी के घाट बनेंगे मंडी में, पर्यटन प्रोजेक्ट बनेंगे जंजैहली में, हवाई पट्टी बनेगी बल्ह में। अभी वे लिस्ट पढ़ ही रहे थे कि सत्तापक्ष से आईपीएच मंत्री महेंद्र बोले, आप तो मंडी के जमाई हैं, इससे तकलीफ क्यों हो रही है? हालांकि उनका लहजा मजाकिया था। मुकेश ने कहा कि मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश का होता है, इसलिए समग्र अप्रोच रखिए।

अरे…इनको एक भैंसा जरूर देना यार

अग्निहोत्री ने कहा कि बजट में गाय, भैंस और बकरियां आप बेशक बांटते रहो, लेकिन रोजगार कितना दिया, इस सवाल का जवाब जनता को देना होगा। यह बजट भी रोजगार के अवसर बढ़ाने वाला नहीं है। इस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने ग्रामीण विकास एवं पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर की ओर इशारा करते हुए कहा कि इनको एक भंैसा जरूर देना यार। इस पर सदन में खूब ठहाके भी लगे।

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