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चालक-परिचालकों को एक साल से नहीं मिला नाइट ओवरटाइम ,कर्मचारी बोले, एक माह में नहीं दिया भत्ता तो नहीं करेंगेओवरटाइम

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : प्रदेश में कभी भी एचआरटीसी की बसों के पहिए थम सकते हैं। इससे रोजाना सरकारी बसों में सफर करने वाले हजारों यात्रियों पर संकट आ सकता है।

जानकारी के मुताबिक प्रदेश के सैकड़ों चालक-परिचालकों को 12 महीनों से नाइट का ओवरटाइम भत्ता नहीं मिला है, जिससे उनमें काफी रोष है। ऐसे में चालक-परिचालक रात में बस चलाना बंद कर सकते हैं। यही नहीं निगम के कर्मचारियों को 24 प्रतिशत तक डीए की किश्त भी नहीं दी गई है। एक वर्ष से अधिक अंतराल से निगम के करीब 8 हजार चालक परिचालक अपनी जेब से ही यह खर्चा वहन कर रहे हैं।

एचआरटीसी ड्राइवर यूनियन के अध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने बताया कि प्रदेश परिवहन निगम के चालक व परिचालकों को एक वर्ष का नाइट ओवरटाइम व 24 प्रतिशत डीए की किस्त नहीं दी गई है और सभी चालक परिचालक अपनी जेब से यह खर्च वहन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक माह में यदि सरकार ने नाईट ओवरटाइम जारी नहीं किया तो सभी चालक परिचालक बसों में नाइट ओवरटाइम नहीं लगाएंगे।

प्रशिक्षु परिचालकों का भी लंबित है रात्रि भत्ता

एक ओर जहां निगम के चालकों एवं परिचालकों का रात्रि भत्ता एक वर्ष से नहीं दिया जा रहा है, वहीं इसके साथ ही निगम के प्रशिक्षु परिचालकों का रात्रि भत्ता भी नहीं दिया गया है। प्रदेश भर में अभी भी करीब दो हजार प्रशिक्षु विभिन्न बसों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और वे भी रात्रि के मिलने का इंतजार कर रहे हैं। निगम में प्रशिक्षुओं को 70 रुपये प्रतिदिन रात्रि भत्ता दिया जाता है।

80 प्रतिशत बस रूट हो सकते हैं प्रभावित

एचआरटीसी की प्रतिदिन 80 प्रतिशत बसें प्रदेश के ग्रामीण और बेबस रूटों पर चलती हैं। प्रतिदिन पांच लाख लोग इन बसों में सफर करते हैं। निगम की ज्यादात्तर बसें ग्रामीण रुटों पर चलती है और ऐेसे में चालक परिचालकों को रात में बसों के साथ ही रहना पड़ता है। चालक प परिचालकों ने निगम प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही भत्ता नहीं दिया तो एक माह बाद सभी चालक नाइट ड्यूटी नहीं देंगे और ऐसे में निगम के करीब 80 प्रतिशत तक रूट प्रभावित होंगे। इसकी जिम्मेदारी एचआरटीसी प्रबंधन की ही होगी।

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