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Virbhadra-Stokes

दोनों बुजुर्ग नेताओं को जान-बूझकर रखा गया पाटिल के दौरे से दूर

हिमाचल दस्तक : राजेश मंढोत्रा। शिमला

हिमाचल में कांग्रेस के दो बुजुर्ग नेताओं को मार्गदर्शक मंडल की ओर धकेलने की तैयारी हो रही है। विधानसभा चुनाव हारने के बाद अपनी पार्टी में भी अनदेखी झेल रहे पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और पूर्व मंत्री विद्या स्टोक्स को जानबूझकर नई प्रभारी रजनी पाटिल के दौरे से दूर रखा गया है। समीकरण कितनी तेजी से बदले हैं, इसका अंदाजा वीरभद्र सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू के बयानों से लगता है।

वीरभद्र सिंह कह रहे हैं कि उन्होंने राजनीति से सन्यास नहीं लिया है, इसलिए उन्हें कहीं जाने से कोई नहीं रोक सकता। ये बयान यूं ही नहीं आया है। दूसरी ओर सुक्खू के तेवर कुछ और इशारा कर रहे हैं। वह न केवल रैलियों में दावेदारों को आगे-पीछे कर रहे हैं, बल्कि ये भी कह रहे हैं कि वीरभद्र सिंह अब मार्गदर्शक हैं। वीरभद्र सिंह कांगड़ा, मंडी और कुल्लू के सम्मेलनों से दूर रहे। इसके भी दो संकेत हैं। पहला ये कि कांग्रेस पार्टी मंडी सीट पर वीरभद्र परिवार से बाहर के प्रत्याशी पर विचार कर रही है।

अन्यथा वीरभद्र सिंह को प्रभारी अपने साथ लेतीं। दूसरा संकेत ये कि वीरभद्र सिंह को सुक्खू हटाओ की जिद छोड़कर ठियोग में 13 जुलाई को और सोलन में 14 जुलाई को होने वाले सम्मेलन में जाना पड़ रहा है। इंटक अध्यक्ष के पद पर बदलाव से लेकर अन्य नियुक्तियों के मामले में भी संगठन हावी रहा। ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव में वीरभद्र सिंह का रोल क्या रहेगा? संभव है इस बारे में ठियोग या सोलन सम्मेलन से कुछ संदेश मिले। लेकिन 84 साल के वीरभद्र सिंह और 91 साल की विद्या स्टोक्स के लिए अब पार्टी में प्रभुत्व बनाने की लड़ाई अब भारी लग रही है।

 पुरानी जिद छोड़ ठियोग और सोलन के सम्मेलनों में जाएंगे वीरभद्र
 सुक्खू के तेवर कुछ और इशारा कर रहे, पार्टी पर कब्जे की है जंग

“वीरभद्र सिंह और विद्या स्टोक्स सम्माननीय नेता और कांग्रेस के मार्गदर्शक हैं। उन्हें प्रभारी के दौरे का औपचारिक निमंत्रण नहीं है। वे अपनी इच्छा से प्रदेश के दौरे कर कार्यकर्ताओं से मिल सकते हैं। हाईकमान के संदेश का पालन करते हुए हम सभी संगठन को मजबूती देने में लगे हैं।” -सुखविंद्र सुक्खू, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

लोकसभा के बजाय अगले ‘मुख्यमंत्री’ की लड़ाई

हिमाचल कांगे्रस ने तैयारी तो लोकसभा चुनाव की लड़ाई की करनी थी, लेकिन ये लड़ाई अगले मुख्यमंत्री के लिए शुरू हो गई है। वरिष्ठ कार्यकर्ता इस लड़ाई से मायूस हैं और चाहते हैं कि यदि लीडरशिप में बदलाव भी करना है तो भाजपा की तरह समूथ हो, लेकिन इसके आसार लग नहीं रहे। ऐसे में बहुत कुछ अब पार्टी प्रभारी रजनी पाटिल की उस रिपोर्ट पर निर्भर करेगा, जो वह राहुल गांधी को देंगी।

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