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मां के भक्त मानते हैं मां की शक्ति, शिला के रूप में है बजने वाला पत्थर

नई दिल्ली : आपने भारी-भरकम, विलशालकाय और रंग-बिरंगे पत्थर तो बहुत देखे होंगे, लेकिन क्या कभी घंटी की तरह बजने वाला पत्थर देखा है? जी हां, इस धरती पर ऐसा अचरज भी है। गुजरात में प्रतापगढ़ के निकट साबली में महाकाली माता का मंदिर है। इस मंदिर में ऐसा पत्थर है, जिस पर दूसरा पत्थर मारने से लोहे या पीतल के बजने जैसी आवाजें आती है।voice stone

इस मंदिर में पहुंचने वाले भक्त इस पत्थर को जरूर बजाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से मन की मुराद मां काली तक पहुंच जाती है। महाकाली के मंदिर में स्थित यह बजने वाला पत्थर एक शिला के रूप में स्थित है। भक्तों ने इसके आस-पास कई छोटे पत्थर रख रखें हैं। ताकि जो कोई भी इस मंदिर में दर्शन के लिए आए मां की कृपा पाने के लिए इस शिला को बजा सके। एक तरफ भक्त जहां पत्थर से आवाज आने को मां का चमत्कार मानते हैं, वहीं विज्ञान में भरोसा रखने वाले लोग इसके पीछे वैज्ञानिक कारण खोजते हैं।

यहां दिखता है धार्मिक सद्भाव

इस मंदिर और मां के चमत्कारों में ऐसा नहीं है कि केवल हिंदू ही भरोसा करते हैं। बल्कि मुस्लिम भक्त भी मां का आशीर्वाद लेने इस मंदिर में बड़ी संख्या में आते हैं। यहां मां काली शिलाओं के बीच स्थित मंदिर में विराजमान हैं।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक

इस बजने वाले पत्थर के विषय में वैज्ञानिकों का मत है कि इस तरह के पत्थरों में आइरन या लोह तत्व की अधिकता होती है। ऐसे में जब इस शिला पर दूसरे पत्थर से चोट मारी जाती है तो इसमें इलैक्ट्रिकल स्ट्रेस (विद्युत बल) बनता है और जब यह स्ट्रेस रिलीस होता है तब हमें किसी धातु के बजने की आवाज सुनाई देती है।

भक्त नकारते हैं इस विचार को

कई भक्त विज्ञान के इस तर्क पर अविश्वास जताते हैं। उनका कहना है कि लोह तत्व की अधिकता से पत्थर कैसे बज सकता है, जबकि वह धातु से स्वरूप में न हो। साथ ही वह सवाल उठाते हैं कि पूरी पहाड़ी पर बाकी किसी पत्थर में इस तत्व की अधिकता नहीं है, केवल इस पत्थर में ही क्यों है? अब विज्ञान और श्रद्धा पर किसी तरह का सवाल न उठाते हुए, हम यह आप लोगों पर छोड़ रहे हैं कि आप इसे क्या मानेंगे।

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