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मिनरल

मिनरल शरीर को स्वस्थ और रोगमुक्त रखते हैं। कुछ मिनरल की जरूरत शरीर को अधिक होती है, तो कुछ को कम मात्रा में लेना ही काफी होता है। शरीर को पर्याप्त मात्रा में मिनरल की पूर्ति हो, इसके लिए प्रोसेस्ड फूड कम खाएं।

कैल्शियम

यह मिनरल दांत व हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी है। मस्तिष्क से नसों के जरिए संदेशों को पहुंचाने के लिए भी यह मिनरल जरूरी है। कैल्शियम की जरूरत शरीर को अधिक मात्रा में होती है। हमें नियमित 400 एमजी कैल्शियम की जरूरत होती है।

क्या खाएं : दूध, दही व पनीर आदि डेयरी उत्पाद, तिल व अंजीर।

क्लोराइड

यह मिनरल सोडियम के साथ काम करते हुए शरीर में फ्लुइड्स और पीएच का संतुलन बनाए रखता है। यह हाइड्रोक्लोराइड एसिड बनाने में सहायक है, जो प्रोटीन को विभाजित करता है। साथ ही मैग्नीशियम व पोटाशियम ग्रहण करने की क्षमता बढ़ाता है।

क्या खाएं : हमारी डाइट में अधिकतर क्लोराइड की पूर्ति नमक से हो जाती है। इसके अलावा जैतून, टमाटर, लेट्यूस आदि खाएं।

तांबा

ये मिनरल लाल रक्त कोशिकाएं बनाने में मदद करता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता व तंत्र कोशिकाओं को दुरुस्त रखता है। इससे घाव भरने में आसानी रहती है। यह एक जरूरी एंटीऑक्सीडेंट है, जिसकी कमी होने पर ब्लड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है।

क्या खाएं : तिल, काजू, पालक, सोयाबीन, शतावरी व झींगा।

फ्लूराइड

यह मिनरल दांत व हड्डियों दोनों में पाया जाता है। दांतों को शर्करा व बैक्टीरिया के कारण होने वाले नुकसान से भी यह मिनरल बचाता है। यह मिनरल दांतों के इनेमल्स यानी बाहरी सफेद परत को मजबूत बनाता है।

क्या खाएं : पानी में प्राकृतिक रूप से फ्लूराइड होता है। इसके अलावा अखरोट, चाय व कोकोआ पाउडर में फ्लूराइड होता है।

जिंक

यह इम्यून सिस्टम को ठीक रखता है। इंसुलिन समेत सभी हार्मोन की क्रियाओं को सही रखने में सहायक है। थाइरॉयड और लिवर के लिए जरूरी है। पुरुषों में इसकी कमी, स्पर्म काउंट कम कर सकती है।

क्या खाएं : सीफूड, डेयरी उत्पाद, मेवे, दही, पालक, ब्रोकली, अंडा, टोफू व सेम और साबुत अनाज।

आयरन

शरीर में हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए भी यह जरूरी है, जिसकी मदद से खून में ऑक्सीजन का संचार दुरुस्त रहता है। आयरन की मौजूदगी कोशिकाओं, त्वचा, बाल और नाखून को स्वस्थ रखती है। इम्यून सिस्टम बेहतर काम करता है। नई कोशिकाओं के निर्माण में भी इस मिनरल की उपयोगी भूमिका होती है।

क्या खाएं : आयरन के दो तरह के स्रोत होते हैं। पहला हेम, जिसे शरीर आसानी से ग्रहण करता है। यह रेड मीट, मुर्गी उत्पाद व मछली में पाया जाता है। दूसरा नॉन हेम, जो आसानी से ग्रहण नहीं किया जाता, इसकी जरूरत अधिक होती है। ये वनस्पतिजन्य उत्पाद जैसे अनाज, हरी सब्जियों व सेम में पाया जाता है।

मैग्नीशियम

प्रोटीन और फैटी एसिड बनाने में यह मिनरल उपयोगी है। साथ ही थाइरॉयड ग्रंथि को भी सक्रिय रखता है। यह एक प्रभावी एंटी-ऑक्सीडेंट है। शरीर के 300 से अधिक एंजाइम्स की क्रियाओं को प्रभावित करता है।

क्या खाएं : सीफूड, अखरोट, सीताफल और पालक।

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