सीने में हो दर्द, बैठने पर मिले आराम तो ये हैं हार्टअटैक के लक्षण

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव मरवाहा से हार्टअटैक विषय में बातचीत

Heart Attack/ ह्रदयाघात : गर सीने में हल्का दर्द हो रहा है, तो यह कोई हार्ट की समस्या नहीं। दिक्कत तो तब है जब सीने में चलते-चलते ज्यादा पेन हो और फिर बैठने पर आराम मिले। यही हार्टअटैक के शुरुआती लक्षण हैं। ऐसा हृदय रोग विशेषज्ञ राजीव मरवाहा कहते हैं। डॉ. मरवाहा जिला मुख्यालय पर चल रहे हृदय रोग जांच शिविर में पहुंचे हैं। IGMC में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर कार्डियोलॉजी कार्यरत राजीव मरवाहा से हिमाचल दस्तक के चंबा जिला के ब्यूरो प्रमुख सोमी प्रकाश भुव्वेटा ने विशेष बातचीत की……

चंबा में हार्ट के काफी मरीज हैं। आप भी चंबा से हैं। कभी सोचा था कि इतने ज्यादा हार्ट के पेशेंट भी चंबा में हो सकते हैं? देखिए, दो बार मिलेनियम पीपल सोसाइटी के माध्यम से हम यहां निशुल्क हार्ट कैंप लगा चुके हैं। पहली बार जब कैंप में काफी ज्यादा हार्ट के मरीज इंडेंटिफाई हुए तो काफी हैरान था। लेकिन, तीसरी बार मैं खुद ही मेंटली प्रीपेयर था कि अब घटेंगे नहीं अब तो दिल के मरीज बढ़ेंगे ही।

चंबा जिला तो पहाड़ी इलाका है। फिर इतने ज्यादा हार्ट के मरीज होने की वजह क्या हो सकती है?

खानपान में अव्यवस्था और शारीरिक कसरत न होना ही इसकी मुख्य वजह है। पहले लोग समय पर खाना खाते थे और शारीरिक कसरत भी करते थे। लेकिन, आजकल थोड़ा सा दूर भी जाना हो तो लोग दो पहिया वाहन पर जा रहे हैं। शारीरिक कसरत के लिए लोग बेडमिंटन या फिर फुटबाल खेलते थे। अब तो सभी तरह की कसरत छोड़ अधिकतर लोग मोबाइल पर ही चिपके रहते हैं। इसी का खामियाजा लोग भुगत रहे हैं।

वैसे हार्टअटैक के लक्षण क्या हैं?

सीने में चलते-चलते ज्यादा पेन हो और फिर बैठने पर आराम मिले। यही हार्टअटैक के शुरुआती लक्षण हैं। कई बार सीने में हल्की सी पेन भी होती है तो इसे लोग क्या समझें?

देखिए ज्यादा टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। यह कोई हार्ट की प्रॉब्लम नहीं है। दिक्कत तो तब है जब सीने में चलते-चलते ज्यादा पेन हो और फिर बैठने पर आराम मिले।

हार्टअटैक में स्टंट की जरूरत कब रहती है?

हार्टअटैक के चलते चौबीस घंटे के भीतर यदि मरीज रिकवर नहीं होता है तो फिर स्टंट डलेगा ही पड़ता है। क्योंकि, मरीज को सीने में दर्द उठने और फिर चौबीस घंटे के भीतर रिकवर न होने पर ही ज्यादा खतरा रहता है। कई मरीज ऐसी भी मिले हैं, जिन्हें एक अस्पताल में स्टंट डालने की सलाह दी गई, तो दूसरे अस्पताल में स्टंट डालने की मनाही कर दी गई?Heart Attack

कहना तो नहीं चाह रहा था, लेकिन लोगों की सेहत से जुड़ी बात होने के कारण यह स्पष्ट कहना चाह रहा हूं कि स्टंट तैयार करने वाली कंपनियां इतनी अमीर हैं कि वे अपने पैसों से देश चला सकती हैं। इसलिए मैं आपको पहले ही कह चुका हूं कि चौबीस घंटे के भीतर हार्ट की प्रॉब्लम दुरुस्त नहीं होती है, तो तभी स्टंट डलवाना समझदारी है।

हार्ट की समस्या से जूझ रहे मरीज दुविधा में हैं क्योंकि कोई पेसमेकर की बात करता है तो कई स्टंट की बात? ऐसी स्थिति में मरीज को क्या करना चाहिए?

मैं एक प्रोफेशनल हूं। इसलिए किसी पर टिप्पणी करने की बजाय यही कहूंगा कि हिमाचल बॉर्डर तक सब ठीक है। उसके बाद क्या कुछ होता है, बताने की जरूरत नहीं। लोग समझदार हैं।

नब्बे प्रतिशत ब्लॉकेज पर पेशेंट सरवाइव कर सकता है या नहीं?

बिल्कुल कर सकता है, लेकिन पेशेंट को डॉक्टर की सलाह पर अमल करने के साथ-साथ दवाइयों का सेवन समय पर करना चाहिए।

हार्ट की समस्या पैदा न हो, इसलिए इंसान को क्या करना चाहिए?

सही समय पर भोजन करने की आदत। ऑयली खाने से दूरी। रोजाना सुबह-शाम कम से कम 45 मिनट की सैर करने से इस समस्या से बचा जा सकता है। आपने ऑयली खाने की बात कही है, तो चंबा में तो मदरा सबसे ज्यादा ऑयली होता है? तो क्या इसे बंद कर देना चाहिए।
नहीं-नहीं मदरा बंद नहीं होना चाहिए। क्योंकि, हमारी पारंपरिक चंबयाली धाम का ही तो यह हिस्सा है। लेकिन, इसे खाने के बाद कम से पांच से छह किलोमीटर पैदल चलना चाहिए। मतलब खाने के बाद इसे पचाना जरूरी है।

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