News Flash
old age

कमजोर पड़ रही मांसपेशियों को ठीक करना हो सकेगा संभव

लंदन
वैज्ञानिकों ने इस बात का पता लगा लिया है कि बुढ़ापे में लोगों की मांसपेशियां क्यों कमजोर होने लगती है। ऐसी संभावना है कि इस खोज से भविष्य में इसका इलाज संभव हो सकेगा। जैसे- जैसे लोग बुढ़ापे की तरफ बढ़ते जाते हैं उनकी मांसपेशियां तेजी से छोटी और कमजोर पड़ती जाती हैं, जिससे कमजोरी और अक्षमता बढ़ती जाती है। लंबे समय तक जीने वाले हर व्यक्ति को इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। हालांकि अब तक इस प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझा नहीं जा सका था।

जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी में प्रकाशित अनुसंधान से पता चला है कि तंत्रिका तंत्र में बदलाव होने की वजह से मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं। ब्रिटेन की मैनचेस्टर मेट्रोपोलिटन यूनिवर्सिटी और द यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के साथ ही कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू के अनुसंधानकर्ताओं ने मांसपेशी उत्तक के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करने के लिए एमआरआई का इस्तेमाल किया। 75 साल की उम्र तक पैरों को नियंत्रित करने वाला तंत्रिका तंत्र 30 से 50 फीसदी तक कमजोर हो जाता है। इससे मांसपेशियों के कुछ हिस्से का संपर्क तंत्रिका तंत्र से टूट जाता है। इस प्रक्रिया में मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं।

हमदर्दी रखना वंशाणुओं पर निर्भर – अध्ययन

लंदन। इंसानों में हमदर्दी की भावना केवल उसके पालन- पोषण और अनुभव पर ही निर्भर नहीं करती बल्कि उनके वंशाणु भी इसके पीछे जिम्मेदार होते हैं। भारतीय मूल के एक वैज्ञानिक समेत कुछ अन्य अनुसंधानकर्ताओं ने यह दावा किया है। समानुभूति के दो हिस्से होते हैं, पहला दूसरे व्यक्ति के विचार और भावनाओं को पहचानने की क्षमता और दूसरा किसी के विचारों और भावनाओं पर उचित भावना के साथ प्रतिक्रिया देने की क्षमता। पहले हिस्से को ज्ञानात्मक समानुभूति कहा जाता है और दूसरा हिस्सा प्रभावी समानुभूति कहलाता है।

आज से15 साल पहले यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के वैज्ञानिकों ने समानुभूति गुणक( ईक्यू) विकसित किया था जो समानुभूति मापने का एक संक्षिप्त तरीका है। ईक्यू के जरिए समानुभूति के दोनो हिस्सों को मापा जाता है। पूर्व में हुए अनुसंधान दिखाते हैं कि हम में से कुछ लोग दूसरों के मुकाबले ज्यादा हमदर्दी रखने वाले होते हैं और औसतन महिलाएं पुरुषों से ज्यादा हमदर्दी महसूस करती हैं।

कैंब्रिज और अनुवांशिक विज्ञान कंपनी23 एंडमी ने समानुभूति पर सबसे बड़ा अनुवांशिक अध्ययन किया जिसमें46,000 से ज्यादा प्रतिभागियों से सूचनाएं जुटाई गईं। ट्रांसलेशनल साइकाइट्री पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में पाया गया कि हम कितनी हमदर्दी रखते हैं यह कुछ हद तक अनुवांशिकी पर निर्भर करता है।

Comments

Coming soon

Career Counsling

Get free career counsling and pursue your dreams