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  • सिगरेट पीने वाले 62 फीसदी लोग दिल के मरीज

  • आईजीएमसी के अध्ययन में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

हिमाचल दस्तक,अर्चना वर्मा। शिमला : धूम्रपान लोगों में दिल का रोग बांट रहा है। सिगरेट पीने से जहां कैंसर जैसी घातक बीमारी होती हैं, वहीं सिगरेट पीना आपको दिल का मरीज भी बना सकता है। आईजीएमसी शिमला की रिपोर्ट के अनुसार 62 फीसदी दिल के मरीज सिगरेट पीने की वजह से हैं। इनमें 79 प्रतिशत पुरुष और 18 प्रतिशत महिलाएं हैं। आए दिन आईजीएमसी में दिल के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। महीने में 250 से 300 की संख्या में दिल के मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें से 40 से कम उम्र के भी 8 प्रतिशत लोग हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि हृदय रोगों में ज्यादातर 30 से 40 की उम्र के लोग हैं। आमतौर पर दिल का दौरा तब पड़ता है, जब हृदय को ब्लड की सप्लाई नहीं मिल पाती। इससे ह्दय में ब्लॉकेज की समस्या हो जाती है। ब्लॉकेज की वजह से हार्ट डैमेज हो जाता है। आमतौर पर अगर इस स्थिति में मरीजों को अस्पताल समय पर न पहुंचाया जाए, तो हार्ट को डैमेज होने से नहीं बचाया जा सकता।

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ध्रूमपान करने से 62.2 प्रतिशत में दिल का रोग पाया गया है। इनमें से पुरूषों की संख्या 79.8 प्रतिशत और महिलाओ की 18.6 प्रतिशत है। ये आंकड़े आईजीएमसी के कॉर्डियोलॉजी विभाग के डाक्टरों की रिसर्च के हैं। डाक्टरों की सलाह है कि हृदय रोग को गंभीरता से लेना चाहिए। हार्ट की ब्लॉकेज को समय पर रिमूव करना जरूरी है। अगर ऐसा करने में देर हो जाए तो हार्ट डैमैज हो जाता है, जिसको ठीक नहीं किया जा सकता। मरीजों का समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता, जिस कारण सिर्फ 30 प्रतिशत लोगों का ही इलाज हो पाता है।

इन कारणों से होता है दिल का रोग

धूम्रपान करना, डायबिटीस्ज, हाई ब्लड प्रेशर, वजन ज्यादा होना, कैलोस्ट्रॉल ज्यादा होना आदि कारणों से हार्ट अटैक होने की ज्यादा संभावना है। आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में असंतुलित भोजन भी इस रोग की एक बड़ी वजह है।

हार्ट अटैक के लक्षण

सीने में दर्द होना, ठंडे पसीने आना, जी मचलाना, उल्टी आना, कमजोरी महसूस होना, चक्कर या बेहोशी का दौरा पडऩा, चलते समय सांस का फूलना इस बीमारी के लक्षण हैं। 30 से 40 की उम्र के लोगों को अगर ऐसा हो तो उन्हें समझ जाना चाहिए कि यह हार्ट से संबंधित बीमारी है।

हार्ट अटैक में 100 में से 70 लोगों की अस्पताल में देर से पहुंचने से मौत हो जाती है। इस बारे में लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। हमने शिमला जिला को गोद लिया। जिले के ऐसे 10 अस्पताल लिए हैं, जिसमें तुरंत हार्ट फेल होने से बचाया जा सकता है। नेशनल हेल्थ मिशन भी इसमें हमारे साथ काम कर रहा है।

डॉ. पीसी नेगी, कार्डियोलॉजिस्ट एवं विभागाध्यक्ष आईजीएमसी

 

 

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