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spinal cord tuberculosis

ऐसी बीमारी जिसके बारे में लोग काम जागरूक

कई लोगों को यह मजाक लगेगा, क्योंकि टीबी तो फेफड़े से जुड़ी बीमारी है। वास्तव में काफी सारे लोग आज भी टीबी को मात्र फेफड़े से जुड़ी बीमारी ही समझते हैं। यह एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में लोग काम जागरूक हैं। यहां तक कि अगर आंकड़े देखें तो फेफड़े की टीबी और रीढ़ की हड्डी की टीबी लगभग एक समान लोगों को पीडि़त करती है।

यह रोग कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण शरीर में फैलता है

रीढ़ की टीबी के लिए सीटी स्कैन, एमआरआई जैसे टेस्ट कराए जाते हैं। माइको बैक्टीरियम नामक जीवाणु काइफोटिक डेफोर्मिटी (रीढ़ के हड्डी के संकुचन) नामक समस्या को उत्पन्न कर सकते हैं। माइको बैक्टीरियम जीवाणु टीबी से पीडि़त व्यक्ति के खून या सांस के जरिए शरीर में पहुंचता है।

यह रोग कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण शरीर में फैलता है और रक्त में प्रवाह हो जाता है। इसके बाद यह शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है। यह टीबी रीढ़ की हड्डी को संकुचित कर देता है। इस कारण कई तरह की न्यूरो प्रॉब्लम्स उत्पन्न हो जाती हैं।spinal cord tuberculosis

इस बीमारी का इलाज अंतितुबरक्युलेर कीमोथैरेपी से किया जाता है। इस थैरेपी की सुविधा काफी सारे सरकारी अस्पतालों में और डिस्पेंसरियों में उपलब्ध है। नेशनल ट्यूबरक्लोसिस कंट्रोल प्रोग्राम के अंतर्गत यह थैरेपी निशुल्क उपलब्ध है। क्योंकि इस बीमारी में रीढ़ की हड्डी संक्रमण और पास पडऩे के कारण गल चुकी होती है, इसलिए इसे विकृति से बचाने के लिए ब्रेस (एक तरह की बेल्ट) की मदद ली जाती है, ताकि रीढ़ की हड्डी को सपोर्ट मिल सके।

रीढ़ की हड्डी के टीबी का नया इलाज

आजकल रीढ़ की हड्डी के टीबी का नया इलाज नई सिक्स ड्रग्स एटीटी थैरेपी के रूप में आ चुका है। इस थैरेपी से आप कम समय में इस बीमारी पर काबू पा सकते हैं और इस बीमारी की आगे बढऩे की संभावनाएं खत्म हो जाती हैं।

ऑपरेशन की जरूरत तब होती है, अगर रीढ़ की हड्डी के आंतरिक भाग में बहुत सारा पूस भरा हो, जो नसों को दबा देता है। ऐसी स्थिति में मरीज को लकवा लगने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे हालातों में ऑपरेशन करके पूस को निकाल लिया जाता है। आज के आधुनिक युग में टीबी से क्षतिग्रस्त विकारग्रस्त वर्टिब्रा की समस्या दूर करने के लिए थ्री डी प्रिंटिंग और कंप्यूटराइज्ड नेविगेशन जैसी तकनीकों का
इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक के जरिए विकारग्रस्त वर्टिब्रा को आर्टिफीशियल वर्टिब्रा से बदल देते हैं।

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