रिकांगपिओ – सरकार द्वारा गरीब, अशिक्षित, अनुसूचित जाति, जनजाति, मानसिक रोगी, दिव्यांग व्यक्तियों, औघोगिक कर्मकार, महिलाओं व बच्चों को निःशुल्क कानूनी सेवा का अधिकार दिया गया है। ये शब्द सिविल जज एवं अध्यक्ष विधिक साक्षरता समिति किन्नौर अरविंद मलिक ने ग्राम पंचायत रिब्बा में कासूराज मंदिर के प्रांगण में विधिक साक्षरता शिविर की अध्यक्षता करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि सरकारी खर्च से वकील मिल सकता है।

कोर्ट की फीस, गवाहों का खर्चा, फैसले की नकल, टाइप आदि का खर्चा भी सरकार अदा करती है। मुफ्त कानूनी सहायता के लिए सालाना आय एक लाख रुपए से कम होनी चाहिए। मुफ्त कानूनी सेवा सभी दीवानी, आपराधिक, राजस्व तथा प्रशासनिक मुकदमों के लिए दी जाती है।

इस अवसर पर अधिवक्ता नसीब सिंह नेगी ने घरेलू हिंसा से महिलाअों की सुरक्षा अधिनियम, लोकल रीति-रिवाज व मोटर दुर्घटनाओं के शिकार व्यक्तियों के प्रतिकार तथा अधिवक्ता सत्यपाल नेगी ने पत्नी, बच्चों व माता-पिता के खर्च व भरण-पोषण के अधिकार और अधिवक्ता मुकेश बोरिस ने सूचना के अधिकार के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर अध्यक्ष महिला कल्याण परिषद किन्नौर रतन मंजरी, बीडीसी सदस्य ठाकुर लाल, प्रधान रिब्बा प्रेम प्रकाश नेगी, उपप्रधान सहित महिला मंडल व स्थानीय लोग मौजूद थे।

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