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262 road accidents

गत वर्ष जिला सिरमौर में हुई 262 सड़क दुर्घटनाएं

इन दुर्घटनाओं में 458 लोग हुए घायल

रमेश पहाडिय़ा। नाहन
जहां सड़कें प्रदेश की भाग्य रेखाएं कही जाती हैं, वहीं जिला सिरमौर यह सड़कें मानव खून की प्यासी बन गई हैं। आलम यह है कि जिला सिरमौर में आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं। जिला सिरमौर में वर्ष 2018 में 262 सड़क दुर्घटनाएं हुई है। यानी जिला में हर दूसरे दिन एक से अधिक हादसे हो रहे हैं। इन सड़क दुर्घटनाओं में जहां 102 लोग बेमौत मारे गए हैं, वहीं 458 लोग इन दुर्घटनाओं में घायल हुए हैं।

ये सड़क हादसे कई परिवारों को कभी न भरने वाले जख्म दे गए हैं। यह आलम न केवल जिला सिरमौर का है, बल्कि यदि पूरे प्रदेश की बात करें तो राज्य में हर दूसरे दिन तीन से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो रही है। जिला सिरमौर में भले ही वर्ष 2017 अपेक्षा 2018 में सड़क हादसों में की आई लेकिन फिर भी सड़क दुर्घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।

खस्ताहाल सड़कें भी दुर्घटनाओं का मुख्य कारण

हिमाचल दस्तक द्वारा जुटाई गई जानकारी के मुताबिक जिला सिरमौर में वर्ष 2017 में 305 सड़क दुर्घटनाएं हुई थी। जबकि वर्ष 2018 में हादसों में काफी कमी दर्ज हुई है। वर्ष 2017 में जिला सिरमौर में जहां सड़क दुर्घटनाओं में 125 लोग मारे गए थे, वहीं 2018 में यह आंकड़ा घटकर 102 रह गया है। इन सड़क दुर्घटनाओं में वर्ष 2017 में 512 लोग घायल हुए थे, जबकि 2018 में यह संख्या 458 रह गई है।

बताते हैं कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी का कारण पुलिस प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान भी काफी मददगार हो रहा है। लेकिन यदि हम जीरो टॉलरेंस की बात करें तो इसके लिए न तो प्रदेश की सड़कें इतनी बेहतर हैं और न ही यातायात व्यवस्था। यदि जिला सिरमौर की बात करें तो जिले के ग्रामीण इलाकों की सड़कों में न तो लोक निर्माण विभाग द्वारा पैराफिर बनाए गए हैं और न ही क्रैश बैरियर लगाए गए हैं। यही नहीं खस्ताहाल सड़कें भी दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बन रहा है।

सिरमौर में सौ से अधिक ब्लैक स्पाट

जानकारी के मुताबिक जिला सिरमौर में सौ से अधिक ब्लैक स्पाट है। जो लोक निर्माण विभाग और अन्य एजेंसियों द्वारा चिन्हित किए गए हैं। हैरत की बात तो यह है कि अब तक न तो इन ब्लैक स्पॉट को चौड़ा किया गया है और न ही उन स्थानों पर दिशासूचक बोर्ड लगाए गए हैं।
जानकार बातते हैं कि सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण रैश ड्राइविंग व नौसिखिए वाहन चालक भी हैं।

गत दिनों श्रीरेणुकाजी के पास स्कूली बस दुर्घटना वाले स्थल पर भी न तो क्रैश बैरियर था और न ही पैराफिट लगाए गए थे। भले ही स्कूल बस दुर्घटना का कारण बस में तकनीकी खराबी बताया जा रहा है। बस को तकनीकी रूप से ठीक न करवाने के चलते स्कूल प्रबंधन की लापरवाही से चालक समेत सात बच्चे बेमौत मारे गए।

जिला सिरमौर में पांच वर्षों में बढ़े सड़क हादसे :

– 7 जून, 2013 को संगड़ाह के भराड़ी के समीप निजी बस दुर्घटनाग्रस्त, 20 की मौत।

– 27 सितंबर, 2013 को श्रीरेणुकाजी के समीप निजी बस खाई में गिरी, 21 की मौत।

– 7 अप्रैल, 2014 को टिंबी के समीप निजी बस खाई में गिरी, 21 मरे, 44 घायल।

– 16 जून, 2014 को श्रीरेणुकाजी के बिरला के नजदीक पर्यटकों की बस खाई में गिरी, 18 की मौत।

– 24 नवंबर, 2014 को सैल में बस खाई में गिरी, सात मरे।

– 29 अप्रैल, 2015 को शिलाई के टटियाना में निजी बस दुर्घटनाग्रस्त, पांच की मौत, 38 घायल।

– 26 फरवरी, 2016 को हाब्बन-चंबीधार मार्ग पर निजी बस खाई में गिरी, सात की मौत 17 घायल

– 13 मई, 2018 को राजगढ़ के नेईनेटी में निजी बस दुर्घटनाग्रस्त, 8 की मौत, 12 घायल

– 25 नवंबर, 2018 को श्रीरेणुकाजी के जलाल पुल से निजी बस नदी में गिरी, 9 मरे 52 घायल।

-5 जनवरी, 2019 को श्रीरेणुकाजी के खड़कोली में स्कूली बस दुर्घटनाग्रस्त 8 मरे, 11 घायल।

पुलिस विभाग द्वारा समय-समय पर वाहन चालकों व आम नागरिकों के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाता है। जागरूकता अभियान के चलते और पुलिस द्वारा वाहन चालकों पर शिकंजा कसने से ही वर्ष 2018 में वाहन दुर्घटनाओं में काफी कमी दर्ज की गई है।  – विरेंद्र ठाकुर, एएसपी सिरमौर।

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