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कृषि मंत्री मार्कंडेय के मामला उठाने पर केंद्र से मिला मुआवजा

  • जनजातीय जिला में बेमौसम हुई बर्फबारी से किसानों -बागवानों को हुआ था भारी नुकसान
  • प्रदेश के हक में आवाज उठाने से लोगों में खुशी का माहौल

मोहन कपूर। केलांग
हाल ही में जनजातीय जिला लाहौल एवं स्पीति में बेमौसम हुई बर्फबारी से करीब 37 करोड़ रुपये का सेब तबाह हुआ है। बेमौसम हुई बर्फबारी ने लाहौल-स्पीति के किसानों-बागवानों की कमर को पूरी तरह से तोड़ कर रख दिया है। सोमवार को कृषि मंत्री डॉक्टर रामलाल मार्कंडेय ने जब केंद्र सरकार को लाहौल-स्पीति की पूरी व्यथा से अवगत करवाया तो केंद्र सरकार ने तुरंत लाहौल-स्पीति में बर्फबारी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए 37 करोड़ रुपये जारी करने की हामी भर दी है।

लाहौल-स्पीति में बागवानों-किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए कृषि मंत्री ने जोरदार तरीके से केंद्र सरकार के समक्ष उनका पक्ष रखा। पक्ष रखने के साथ-साथ डॉक्टर मार्कंडेय लाहौल-स्पीति के किसानों को मुआवजा स्वीकृत करवाने में पूरी तरह से सफल भी हो गए हैं। डॉक्टर मार्कंडेय जिस तरह से केंद्र सरकार से हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, उससे प्रदेश का हर किसान व बागवान उनकी कार्यप्रणाली से जहां पूरी तरह से संतुष्ट है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार के समक्ष उनकी बात को जोरदार तरीके से रखने पर वह कृषि मंत्री से काफी खुश भी हैं।

सितंबर में भी की थी सैलानियों की मदद

सितंबर माह में जनजातीय जिला लाहौल एवं स्पीति में बेमौसम भारी बर्फबारी होने के चलते किसानों व बागवानों की नकदी फसलें जहां तबाह हुईं, वहीं बाहरी राज्यों के अधिकतर सैलानी भी वहीं पर ही फंस कर रह गए थे। इसमें भी डॉक्टर मार्कंडेय खुद आगे आए तथा केंद्र सरकार की मदद से हेलिकॉप्टर के जरिए सभी लोगों को सुरक्षित कुल्लू पहुंचाया।

मजदूर लोगों को डॉक्टर मार्कंडेय ने खुद अपनी जेब से किराया देकर उन्हें अपने-अपने घरों को भी भेजा था। उसके बाद कृषि मंत्री ने लाहौल-स्पीति के समस्त जिला प्रशासन से बैठक कर नुकसान का आकलन किया। अब केंद्र सरकार से कृषि मंत्री बागवानों के लिए 37 करोड़ रुपये स्वीकृत करवाने में सफल भी साबित हुए हैं।

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