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हर दिन चुनावी आकलन पर होती रहेगी चर्चा

कभी सरकार बनेगी, तो कभी मायूसी भी होगी

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
चुनावी प्रचार, प्रचार और मतदान तक प्रदेश के नेताओं ने खूब पसीना बहाया, मगर परिणाम एक माह नौ दिन बाद निकलेगा। इन 40 दिनों के भीतर अब प्रदेश के नेता क्या करेंगे? क्या ये गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी के पक्ष में प्रचार के लिए भी जा सकते हैं।
राज्य में हर पांच साल बाद नई सरकार बनती है। इसके मद्देनजर इस बार भी सरकार की चिंता सिर्फ नेताओं को सताएगी। यहां हर दिन चुनावी आकलन पर चर्चाएं भी होती रहेंगी।

कभी सरकार बनेगी तो कभी राजनीतिक दलों के नेताओं को मायूसी का भी सामना करना पड़ेगा। क्योंकि किन मतदाताओं ने किसे वोट दिया इसे गुप्त रखा जाता है। प्रदेश में खास कर कांग्रेस के वीरभद्र सिंह और बीजेपी से प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी हैं, इन्हें चुनावी परिणाम के लिए चिंता सताने लगेगी। इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के कई दिग्गजों के लिए साख का सवाल बन चुका है। खास कर उन्हें जिनके परिवार से दो-दो प्रत्याशी मैदान में उतरे हैं।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर के लिए दो-दो परिणामों को इंतजार करना पड़ेगा। वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह शिमला ग्रामीण और वे स्वयं अर्की से चुनाव लड़ रहे हैं। कौल सिंह ठाकुर की बेटी चंपा ठाकुर मंडी सदर से और खुद द्रंग से किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं पालमपुर से विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल के लिए भी यह चुनाव साख का सवाल बन चुका है। भले ही वे इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, मगर पालमपुर से उनके बेटे आशीष बुटेल मैदान में हैं।

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