sheshnaag devratha

शेषनाग के नए देवरथ का प्रतिष्ठा समारोह संपन्न, कल दो पौष को बाहू जाएगा नया देवरथ

सैकड़ों श्रद्धालु व दर्जनों देवी देवताओं के कारकून व हारियान बने ऐतिहासिक क्षण के गवाह

मोहन लाल ठाकुर। बंजार
बंजार उपमंडल की जिभी घाटी की दो खाड़ागाढ़ व तिलोकपुर कोठियों के अधिष्ठाता देवता गढ़पति मूल शेषनाग के नए देवरथ का प्राण प्रतिष्ठा समारोह शुक्रवार को जिभी घाटी में दर्जनों वाद्य यंत्रों की कलरव ध्वनि के साथ हजारों श्रद्धालुओं व दर्जनों देवी देवताओं के कारकूनों व हारियानों की मौजूदगी में संपन्न हुआ। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 21 दिसंबर 1973 को गढ़पति मूल शेषनाग जिभी का देवरथ बना था व इसकी प्राण प्रतिष्ठा हुई थी।

अब 44 वर्ष बाद उनके नए देवरथ का निर्माण कार्य 6 दिसंबर से आरंभ किया गया था व 8 दिनों में कुशल कारीगरों के द्वारा अंगाह की लकड़ी व तांबे की धातु से इसका निर्माण कार्य पूर्ण करके 14 दिसंबर को नए देवरथ का प्राण प्रतिष्ठा समारोह उनकी तपोस्थली जिभी मंदिर में आयोजित किया गया। शुक्रवार को उनके जिभी मंदिर में एक शाही धाम का आयोजन किया गया। इसमें हजारों लोगों ने भाग लिया।

इस ऐतिहासिक अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं व भक्तजनों, हारियानों व कारकूनों ने शेषनाग द्वारा अपने देव साम्राज्य को चलाने के लिए स्वयं जीभ के आकार की बनाई गई भूआकृति जिभी में गढ़पति मूल शेषनाग के मंदिर में 14 दिसंबर की मध्यरात्रि को 44 वर्ष बाद शेषनाग के नए देवरथ के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की धार्मिक व पारंपरिक रस्मों को कड़ाके की ठंड में शून्य डिग्री तापमान पर आस्था के जनसैलाब में शेषनाग के चरणों में नतमस्तक होकर निभाया व इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।

आस्था व श्रद्धा के सैलाब में गढ़पति शेषनाग जिभी के चरणों में नतमस्तक हुए

इस प्रतिष्ठा समारोह के तीसरे दिन शेषनाग का देवरथ कल तीन पौष को पारंपरिक तरीके से हर प्रतिष्ठा के तीसरे दिन अपने बाहू दौरे पर रवाना होंगे। जहां वे अर्जित शक्तियों की स्थापना करेंगे । गढ़पति मूल शेषनाग के नए देवरथ के निर्माण कार्य से लेकर प्रतिष्ठा समारोह तक सक्रिय भूमिका निभाने वाले गढ़पति मूल शेषनाग की खाड़ागाढ़ व तिलोकपुर की दो कोठियों के कारकूनों वरिष्ठ कारदार सत्यदेव नेगी, भंडारी लोभूरामए काईथ भादर सिंहए गूर पूर्ण चंदए पुरोहित गोभिंद्र सिंहए पुजारी पुनेराम तथा शेषनाग के तीनों बहढ़ों मिहार बहढ़ के कारदार प्रेमदास व दरोगा प्यारे सिंह, तांदी बहढ़ के कारदार देवराज नेगी व दरोगा खूबराम और खाड़ागाढ़ बहढ़ के कारदार प्रताप सिंह व दरोगा चेतराम और बृतदार केहर सिंह व ज्ञान चंद और देवदूत बालकराम की अगुवाई में 44 वर्ष बाद आयोजित किए जा रहे इस प्राण प्रतिष्ठा समारोह में कुल्लू व मंडी जिला के करीब डेढ़ दर्जन देवी-देवताओं श्रृंगा ऋषि चैहणी, श्रृंगपुर घियागी के श्रृंगा ऋषि व माता बूढ़ी नागिन, देवता शनिचरी गाड़ागुशैण, जालपा माता गाड़ागुशैणी, लोमश ऋषि ढिंयों व सेरी बहढ़, भूमासी देवता अलवाह, शंखचूल देवता बछूट, ज्येष्ठ बहढ़ सुधराणी, छोई देवता शुरागी, विभांडक ऋषि सोझा, लोमश ऋषि सरठी, देवता लक्ष्मीनारायण बाहू, नारायण देवता हिड़ब, मनुष्य महाराज सजवाड़ व पांचवीर देवता लुशवाल आदि के कारकूनों व हारियानों सहित स्थानीय देवी देवताओं के कारकूनों, हारियानों, हजारों श्रद्धालुओं व भक्तजनों के शीश आस्था व श्रद्धा के सैलाब में गढ़पति शेषनाग जिभी के चरणों में नतमस्तक हुए।

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