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ishwar das thakur

ईश्वर दास ठाकुर ने बताया कि मैं कई दिनों से इसी सोच में था कि अपने शरीर को दान कर देना है

हिमाचल दस्तक।
सरकाघाट के भांवला क्षेत्र के बही गांव के 70 वर्षीय ईश्वर दास ठाकुर सपुत्र दुर्गादास ठाकुर ने लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज को अपनी देह दान की है। ईश्वर दास ठाकुर ने बताया कि एक महीना पहले मैंने अपनी देह को दान करने के लिए लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज में आकर पूरी प्रक्रिया व फार्म आदि भर दिए थे उसके बाद पिछले कल मुझे अस्पताल एवं कॉलेज की तरफ से बुलावा आया कि देहदान के लिए प्रक्रिया पूरी होनी है। इसलिए वे लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज जाकर पूरी प्रक्रिया कर चुका हूं। जब भी मेरी मृत्यु होगी मेरा शरीर लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज के लिए दान में दे दिया जाएगा ताकि बच्चे कुछ सीख सकें।

ईश्वर दास ठाकुर ने बताया कि मैं कई दिनों से इसी सोच में था कि अपने शरीर को दान कर देना है

यह सोच मुझे तब हुई एक बार में अस्पताल में दाखिल हुआ था तो वहां पर चर्चा चली की डॉक्टर बनने के लिए पढ़ाई करनी पड़ती है और मृत शरीर की आवश्यकता होती है। लोग अपने मृत शरीर को दान नहीं करते हैं। अगर मृत शरीर दान में मिले तो कई बच्चों को डॉक्टर बनने में सहायता मिल सकेगी तथा वह कई शरीर के कई अंगों पर प्रैक्टिकल कर पाएंगे।

देहदानकर्ता ने बताया कि मेरी उम्र इस वक्त 70 वर्ष है और मैं इस वक्त भी अपने आप को पूरी तरह से स्वस्थ समझता हूं। जब मैंने अपने मृत शरीर को दान करने के लिए घर के सदस्यों से बात की घर के परिवार वालों से बात की तो पहले तो सभी भावुक भी हुए और ऐसा करने के लिए न करने लगे। लेकिन बच्चों ने और परिवार वालों ने मेरा पूरा सहयोग किया। मैंने उन्हें बताया कि तुम लोगों ने मेरी बहुत सेवाएं की है और गंगा से लेकर हरिद्वार और सभी तीर्थों को मुझे पहुंचा चुके हो। अब मेरी अंतिम इच्छा है कृप्या उसे मान लो। वैसे भी यह मृत शरीर बाद में जलकर राख हो जाएगा।

अगर किसी के काम आ जाए। बच्चे मेरे शरीर पर पढ़ाई कर सकें तो यह मेरे लिए मेरी आत्मा के लिए और आप लोगों के लिए भी फक्र की बात होगी। उन्होंने बताया कि मेरे दो लड़के हैं जिनमें से एक पीडब्ल्यूडी में जूनियर इंजीनियर तथा दूसरा सीआईएसफ में उप आदेशक के पद पर जोशीमठ उत्तराखंड में तैनात हैं। भगवान की कृपा से सब कुछ ठीक-ठाक है कश्मीरी देवी का भी मुझे पूरा सहयोग मिला और मैं देहदान करने के लिए तैयार हो सका। उन्होंने अन्य लोगों को भी यह संदेश दिया है कि इस नश्वर शरीर को आग के हवाले कर कुछ नहीं होगा अगर सभी लोग अपनी देह को दान कर देंगे तो आने वाली पीढ़ी के बच्चों को डॉक्टरी की पढ़ाई करने के लिए एक अच्छा साधन मिल जाएगा।

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