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Action on revenue officers in tehsildar dispute possible

मुख्य सचिव ने मंडल आयुक्त को जिम्मेदारी तय करने को कहा, गृह जिला से बाहर किए बिना दिया था चुनाव आयोग में प्रमाण पत्र

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले सात नायब तहसीलदारों के गृह जिले से बाहर न बदलने पर राजस्व अफसरों पर गाज गिर सकती है। चुनाव आयोग द्वारा कारण पूछे जाने के बाद अब मुख्य सचिव ने मंडलीय आयुक्त को फाइल भेजकर कहा है कि जिम्मेदारी अफसरों की जवाबदेही तय की जाए। इसमें ये भी बताना होगा कि किस अफसर ने इन तहसीलदारों को बदले बिना चुनाव आयोग को सर्टिफिकेट भेजा कि सारे तबादले हो चुके हैं।

नियमों के तहत चुनाव से सीधे तौर पर जुड़े अधिकारी को गृह जिले से तबादला किया जाता है। इसमें एसडीएम, तहसीलदार से लेकर अन्य विभागों के अधिकारी भी शामिल रहते हैं। राजस्व विभाग ने भी लोकसभा चुनाव 2019 से पहले तहसीलदारों से लेकर नायब तहसीलदारों के तबादले किए। इसके बाद विभाग की ओर से आयोग को नियमों के तहत सभी के तबादला सब डिविजन से बाहर करने का सर्टिफिकेट जारी कर दिया। इसे मुख्य सचिव की ओर से आयोग को भेज दिया। नियमों के तहत आचार संहिता से पहले ही सभी अधिकारियों का तबादले करने होते हैं। राजस्व विभाग ने तबादला आदेश जारी किए।

सभी का तबादला करने का प्रमाणपत्र भी सरकार ने आयोग को भेज दिया। आचार संहिता लागू होने के दस से बीस दिन बाद फिर से विभाग की ओर से 28 नायब तहसीलदारों से तबादले की मंजूरी का प्रस्ताव चुनाव आयोग को भेजा। आयोग की ओर से 21 को बदलने की मंजूरी तत्काल दे दी। सात नायब तहसीलदार सब तहसीलों में सेवारत थे। इनके पास चुनावों का सीधा काम था।

आयोग ने सरकार के इस आवेदन को महीने बाद मंजूरी दी और जवाब मांगा है कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है। राज्य सरकार की ओर से अभी तक ये तर्क दिया जाता रहा कि नायब तहसीलदारों के तबादले सब डिविजन के बाहर कर दिए थे, लेकिन बाद में जिले से बाहर भेजने को कहा तो दोबारा से अनुमति मांगी है। हालांकि नियमों के तहत तबादलों की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी थी।

 

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