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overload buses

 निजी सहित सरकारी बसों में ओवरलोड सवारी

ललित ठाकुर। पधर

कुल्लू जिला के बंजार में भीषण हादसे बाद भी बसों में ओवरलोडिंग का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है। निजी सहित सरकारी बसों में खचाखच सवारियां भरी जा रही हैं। लगातार हो रहे हादसों के बावजूद न यात्री सबक नही ले रहे हैं, और न ही बस आपरेटर ओवरलोडिंग से परहेज कर रहे हैं। बीते रोज ही बंजार के पास ओवरलोडिंग के कारण निजी बस खाई में गिरने से 44 बेकसूर लोगों की जान चली गई।

लेकिन अगले ही दिन पधर क्षेत्र के कई रुट सुबह और शाम सवारियों से खचाखच भरे नजर आए। हादसे के बावजूद सवारियों ने भी खचाखच भरी बस में बैठने से कोई परहेज नही किया। चालक परिचालक भी बसों में अधिक यात्रियों को बैठने से नही रोक पाए। लोकल रूट में तो बसों की कमी से इस तरह की ओवरलोडिंग देखी गई। वही बसों में 35 सीटर होने के चलते तीन गुना सवारियां बैठाई जा रही है। जिस कारण परिवहन विभाग पर भी सवाल उठ रहे है। लोगो की बार बार मांग करने के बाद भी अधिकारी कुर्सियों में चिपकने के सिवा कुछ नही कर रहे है, और नही पधर पुलिस प्रशासन उस पर कोई कार्रवाई कर रहा है।

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यह कोई पहला मामला नही है इससे पहले भी हर रोज इन सड़कों पर ओवरलोडिंग बसों में लोग सफर कर रहे हैं। लेकिन मंडी- पठानकोट पर चलने वाली निजी बसें सवारियों से खचाखच भरी हुई नजर आई। वही एचआरटीसी की लोकल रुट पर चलने वाली सरकारी बसें मंडी-कुफरी वाया कुन्नू, मंडी-बड़ागांव और खजरी से मंडी बस में सुबह और शाम के समय मे सवारियां बस में खड़े खड़े सफर करते पाई गई।

इन लोकल रूटों में निगम की एकमात्र सेवाओं के चलते जहां आये रोज आम यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं स्कूली विद्यार्थी भी मजबूरन खड़े खड़े सफर को विवश होते हैं। यही हाल अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रो में है जहां कम बस सेवाएं होने से लोगो को परिवहन की पर्याप्त सुविधा नही मिल पा रही हैं। जिससे ग्रामीणों को अभी भी मजबूरन ओवरलोड़ बसों में जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। प्रशासन और पुलिस ऐसे मामलों पर कोई ध्यान नही है।

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