Analysis: 'Shahnai' at Raja's house, 'Band' in Congress

चौतरफा उलझी पार्टी, दंगल में मंगल की जोर-आजमाइश ,  चार सवाल कर रहे बवाल और बेहाल

विश्लेषण : उदयबीर पठानिया

पहली दफा है कि वीरभद्र सिंह के चुप रहने के बावजूद भी कांग्रेस कोई सुख हासिल नहीं कर पा रही है। वीरभद्र सिंह के महलों में उनके बेटे की शादी की शहनाई बज रही है, पर पार्टी स्तर पर चुनावी तैयारियों का बैंड बजा हुआ है। यह अलग बात है कि अभी तक भाजपा भी कोई प्रत्याशी फाइनल नहीं कर पाई है।

भाजपा कम से कम अभी तक यह हल्ला बनाए हुए है कि वह पुराने मोहरों पर दांव खेलेगी। ऐसे में कांग्रेस जिसके पास गंवाने को कुछ नहीं है, वह हासिल करने के खाते में भी उलझन में नजर आ रही है। कांग्रेस हर सीट पर चार बिंदुओं में उलझी हुई है। पहला फैक्टर यह है कि क्या लोकसभा की टिकट किसी सिटिंग एमएलए को देना है या नहीं? दूसरा सवाल यह परेशान कर रहा है कि क्या बुजुर्ग टाइप नेताओं को दंगल में उतारना है नहीं? तिया-पांचा करने वाला तीसरा सवाल यह है कि क्या दूसरे दलों से कांग्रेस में आए नेताओं पर दांव खेलना है या नहीं? अहम और वहम से घिरा हुआ चौथा सवाल यह है कि क्या टिकट किसी को भी उसके रुतबे के ग्राउंड पर देनी या फिर जातिगत समीकरणों की जमीन पर? कहा जा सकता है कि इन चार सवालों के खानों में कांग्रेस चित अवस्था में चल रही है।

सिलसिलेवार बात करें तो कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में भी बिन ताल का भांगड़ा चला हुआ है। विधानसभा चुनाव में जीएस बाली और सुधीर शर्मा की ताल बिगड़ गई थी। अब इनको भी सियासी वनवास से निजात हासिल करने की तलब जगी हुई है। मगर चंबा जिले से आशा कुमारी और पवन काजल से भी जूझना पड़ रहा है। हालांकि यह भी कांग्रेसी मान रहे हैं कि आशा कुमारी फिलवक्त पंजाब की प्रभारी हैं और उनके पास पंजाब की तेरह सीटों का भी भार है। कैप्टन अमरिंदर सिंह से उनकी सियासी टयूनिंग और पुराना कामयाबी का इतिहास शायद ही उनको यहां से लडऩे का मौका हाईकमान दे।

मगर उपरोक्त चार सवालों का चक्रव्यूह यहां भी बना हुआ है। मंडी में तो अभी तक पार्टी अपने भाव को लेकर असमंजस में है। वीरभद्र एंड फैमिली की रजिस्टर्ड इस सीट पर इस बार भाजपा का वजन भी बढ़ गया है। पहली बार जयराम ठाकुर की सीएमशिप की वजह से यह मुख्यमंत्री की सीट बन गई है। हैवी वेट बनी इस सीट पर कांग्रेस के लिए लाइट माहौल नहीं है। ठाकुर कौल सिंह का नाम जरूर है, मगर ‘करार’ आ जाए, ऐसा भी नहीं है। वीरभद्र फैमिली चुप बैठी हुई है । मगर कांग्रेस इस भाजपा के इस फैसले का इंतजार कर रही है कि पंडित सुखराम के पोते से भाजपा पर क्या ‘सितम’ करती है या ‘करम’? साथ ही कुल्लू के महाराज महेश्वर सिंह पर भी कांग्रेसी जमात की नजर वाया वीरभद्र सिंह बनी हुई है।

माना जा रहा है कि पुरानी होली-लॉज की नाटी की ताल में भी कांग्रेस का ध्यान लगा हुआ है। किसी दौर में एमपी, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रहे कुल्लू के राजा में भी राज की संभावनाएं पार्टी फिलवक्त देख रही है । इस बाबत कांग्रेसी सूत्र कहते हैं कि कुल्लू रियासत के राजा को मंडी के नए सियासी ठाकुर अपनी ठकुराई के लिए खतरा आंकते हैं तो हमारी भलाई भी इसमें है। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में तो कांगे्रसियों की नजर समीरपुर के धूमल पैलेस पर बेतरतीब फडफ़ड़ा रहे भगवा झंडे पर है। तीन मर्तबा के लगातार सांसद हो चुके अनुराग ठाकुर के खिलाफ एंटिइनकंवैसी फेक्टर से ज्यादा भाजपा के भीतरी समीकरणों पर नजर गड़ी हुई है। इनका मानना है कि भाजपा का एक बड़ा धड़ा लंबे अरसे अनुराग की जड़े खोद रहा है। भाजपा के भीतर स्थापित हुए जयराम ठाकुर के नए किले पर अनुराग को खतरा खुद भाजपा का एक कैंप मान रहा है। पर कांगे्रस के भीतर भी सब सही नहीं है।

खुद कोई चुनाव लडऩे को तैयार नहीं है। इसमें सिर्फ राजेंद्र राणा एंड सन ही बढ़त बनाए हुए है, जबकि सुक्खू गुट नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के लिए क्लेश बना हुआ है। यहां पर वीरभद्र सिंह पहले ही धूमल फैमिली के खिलाफ राणा फैमिली को आशीर्वाद दे चुके हैं। यहां भी कुछ साफ नहीं है। चौथे वह अंतिम शिमला संसदीय क्षेत्र में भी सुई मौजूदा सोलन के विधायक धनीराम शांडिल और विनोद सुल्तानपुरी के आसपास घूम रही है।

अगर यहां से राहुल गांधी ने यंग ब्रिगेड के लिए वकालत की तो सुल्तानपुरी को सुल्तानी करने का मौका मिलना तय माना जा रहा है। बावजूद इसके कांग्रेस में तूफान उठा हुआ है। कई पॉलिटिकल फार्मूले अप्लाई किए जा रहे हैं। जमा-घटाव, गुणा-भाग सब हो रहा है। पर इनका बराबर है क्या होगा,यह कोई नहीं जानता। इतना जरूर है कि राजा के घर मे शादी की शहनाई बीज हुई है, कार्यकर्ता रूपी बारात तैयार है, पर चार दूल्हे कौन होंगे, इसकी तलाश में पार्टी बाजा बजाय जा रही है।

अजब-गजब शांति

कांग्रेस का कल्चर कुछ और है। कांग्रेस में पहले आपस मे तलवारे निकलती हैं, फिर बाद में दुश्मन पर हमला होता है। पर इस बार कांग्रेस के अंदर भी ठंड है तो बाहर भी यह बर्फ में लगी हुई है। भाजपा भी अपने फाइनल चेहरे नहीं दिखा रही, तो कांग्रेस भी उहापोह में है। आलम देखिए, वीरभद्र ने अपना तमतमाता चेहरा नहीं दिखाया तो भी कांग्रेसी जमात भी अपना जलवा नहीं दिखा पा रही।

स्कोर सेटलमेंट

कांग्रेस की नजर भाजपा नेताओं के आपसी पॉलिटिकल स्कोर सेटलमेंट के क्यासों पर भी है । पुख्ता सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की नजर भाजपा के तीन खेमों, शांता कुमार-प्रेम कुमार धूमल-जयराम ठाकुर पर भी है। इनका अंदाजा है कि पुराने स्कोर सेटल करने के लिए यह खेमे तीन संसदीय क्षेत्रो क्रमश: कांगड़ा, मंडी और हमीरपुर में एक-दूसरे के खिलाफ कोई खेल खेलेंगे। आस है कि इनका खेल बिगड़े तो इनके खेल में कोई और खेल खेला जा सकता है।

संतान युग भी चल रहा है

एक खेल अंदरखाते और चला हुआ है। इस खेल में कहीं पिता का नाम सामने है तो पर्दे के पीछे पुत्र का नाम चल रहा है। पुत्र का नाम आगे है तो पिता का नाम पर्दे के पीछे आगे बढ़ रहा है। मसलन, कांगड़ा में जीएस बाली फ्रंट फुट पर हैं तो बैकफुट पर उनके बेटे रघुवीर सिंह बाली आगे बढ़ रहे हैं। हमीरपुर में अभिषेक राणा का नाम स्टेज पर है तो पर्दे के अंदर एक लॉबी उनके पिता राजिंद्र राणा को प्रत्याशी मान कर चल रही है ।

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