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न सरकार की परवाह न न्यायालय का खौफ

  • नियम ताक पर रखकर खोखे बनाने के लिए 10.05 लाख में गई सरकारी भूमि की बोली
  • दियोटसिद्ध में वन भूमि की फिर हुई बेखौफ नीलामी
  • चार दर्जन के करीब बोलीदाता यहां करेंगे अस्थायी कब्जा

रविंद्र चंदेल। हमीरपुर
वन विभाग के कड़े आदेशों के बावजूद दियोटसिद्ध में डीपीएफ (डिर्माकेटिड प्रोटेक्टिड फॉरेस्ट) वन भूमि की नीलामी कर दी गई है। वन भूमि के अवैध प्रयोग से संबंधित न्यायालय की नोटिफिकेशन को भी नजरअंदाज कर दिया गया है। हैरत तो यह है कि वन भूमि खोखे बनाने के लिए 10.05 लाख में नीलाम भी कर दी गई, लेकिन वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लग पाई है।

वन भूमि पर होने वाले इस अवैध कब्जे के बारे में वन विभाग द्वारा कड़ी कार्रवाई करने के दावे एक बार फिर धराशाही हुए हैं। क्योंकि हर साल वन विभाग दियोटसिद्ध नगर के पास वन भूमि के नीलामी को रोकने के दावे करता है। बावजूद इसके हर साल ग्राम पंचायत चकमोह केंद्र सरकार की वन भूमि को खोखा मार्केट बनाने के लिए सरेआम नीलाम करती आ रही है। हालांकि वन विभाग का दावा है कि ग्राम पंचायत चकमोह को नीलामी न करने के संदर्भ में कड़े निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके यह वन भूमि फिर से नीलाम कर दी गई है।

पंचायत ने यदि नीलामी की है, तो अपने स्तर पर की होगी

अब वन विभाग यह तर्क दे रहा है कि विभाग की ओर से पत्र लिख दिया गया है। इसलिए अब नीलामी होगी ही नहीं। लेकिन अब जब नीलामी हो गई है तो विभाग पूछ रहा है कि कहां की नीलामी हुई है? विभाग को तो कोई जानकारी ही नहीं है। पंचायत ने यदि नीलामी की है, तो अपने स्तर पर की होगी। विभाग के अधिकारी कहते हैं कि दियोटसिद्ध क्षेत्र में निरंतर गश्त जारी है। वन भूमि पर कोई भी स्थायी या अस्थायी निर्माण नहीं होगा।

बता दें कि वन विभाग की इस भूमि पर करीब चार दर्जन दुकानें बनाने के लिए नीलामी की गई है। जिसमें अधिकतम एक महीने के लिए 2.5 लाख रुपया बसूला गया है, जबकि कम से कम एक दुकान के लिए 500 रुपये लिया गया है। वन भूमि की नीलामी से साफ है कि यहां न विभाग की कोई जबावदेही है, न सरकार और हाईकोर्ट की नोटिफिकेशन का कोई खौफ है।

तमाम सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर बनती है खोखा मार्केट

नगर में हर साल ग्राम पंचायत चकमोह की ओर से वन विभाग के डीपीएफ एरिया की नीलामी अस्थायी मार्किट बनाने के लिए की जाती है। विभाग हर बार मानता है कि यह नीलामी अवैध है। नियमानुसार वन भूमि पर किसी प्रकार का अस्थायी या स्थायी निर्माण नहीं हो सकता। बावजूद इसके यहां लकड़ी के अस्थायी ढांचे खड़े करके खोखा मार्किट बनाई जाती है। इस मार्किट के गिरने से एक मर्तबा पहले भी यहां खतरनाक हादसा हो चुका है। लेकिन न यह अवैध नीलामी रुक पाई और न अवैध रूप से होने वाला अस्थायी निर्माण।

जब कोई हादसा होता है तो तमाम जवावदेही और जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार के सिर मढ़ दी जाती है। इतना ही नहीं अवैध रूप से नीलाम की गई भूमि पर बनी मार्किट को बिजली, पानी जैसी तमाम सुविधाएं भी तमाम नियमों को ताक पर रखकर मुहैया करवा दी जाती हैं। बोलीदाता ढांक पर लकड़ी की बल्लियां गाढ़कर लकड़ी के फट्टों का फर्श बनाते हैं और उस पर अपनी दुकानदारी सजाते हैं।

हफ्ता वसूली की तर्ज पर होती है नीलामी रकम की उगाही

नीलामी के पैसे ग्राम पंचायत हफ्ता वसूली की तर्ज पर हर सोमवार को करती है। इसकी बकायदा रसीद भी ग्राम पंचायत की तरफ से दी जाती है।

वन विभाग के कर्मचारियों की गश्त दियोटसिद्ध में जारी है। वन विभाग सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का स्थायी या अस्थायी निर्माण नहीं होने देगा। -प्रीति भंडारी, आईएफएस, डीएफओ हमीरपुर

यह मामला कंसरवेटर व डीएफओ के माध्यम से प्रशासन के ध्यान में लाया गया है। एसडीएम बड़सर एवं चेयरमैन मंदिर ट्रस्ट बाबा बालक नाथ को आदेश दिए गए हैं कि सुरक्षा के मानकों से कोई समझौता करके किसी प्रकार का निर्माण न हो। फिर भी अगर कोई ऐसा करता है तो निर्माण को हटा दिया जाएगा। जहां तक नीलामी का सवाल है, मुझे बताया गया है कि यह वन भूमि का डीपीएफ एरिया है। इसलिए अगर यहां नीलामी हुई है तो इसके लिए वन विभाग ही जबावदेह है। -राकेश कुमार प्रजापति, आईएएस, उपायुक्त हमीरपुर

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