banjar bus accident

हिमाचल में हर 3100 साल हादसे और 1200 लोगों की मौत

  • न हादसों से सबक, न जांच रिपोर्टों से कुछ सीखा
  • बंजार बस हादसे ने फिर खोली रोड सेफ्टी की पोल

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
जिस छोटे से प्रदेश में हर साल तीन हजार से ज्यादा सड़क हादसे हो रहे हों और इनमें हर साल 1200 से ज्यादा लोग जान गंवा रहे हों, तो क्या ये सिर्फ हादसे हैं या जानलेवा लापरवाही? ये सवाल इसलिए क्योंकि कुल्लू के बंजार बस हादसे ने फिर ये पूछा है कि सड़क पर मिलती मौतों का सिलसिला कब थमेगा?

बंजार हादसे में बस बेशक 2009 मॉडल की और फरवरी, 2019 में पास थी, लेकिन ये ओवरलोड थी। मतलब हम ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त बस सेवाएं भी नहीं दे पा रहे हैं। खासकर जब यह बस रूट मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के चुनाव क्षेत्र छतरी तक था। हादसे के स्थान पर जहां से बस गिरी, वह मोड़ चौड़ा था, लेकिन बताते हैं कि गियर बदलते वक्त बस के न्यूट्रल होने से हादसा हुआ। लेकिन ऐसे ही पहले हुए हादसों से भी हमने क्या सीखा? हर बार मैजिस्ट्रीयल जांच होती है, रिपोर्ट दी जाती है, लेकिन आगे कुछ नहीं होता।

पिछले साल नूरपुर बस हादसे में मारे गए मासूम स्कूली बच्चों के हादसे की जांच में आज तक ये पता नहीं चला कि इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार था? यही हश्र कई हादसों का हुआ है। ज्यादा चिंताजनक यह है कि इन हादसों में 90 फीसदी से ज्यादा मानवीय भूल के कारण हो रहे हैं। तकनीकी खामी या खराब रोड के हादसे 10 फीसदी से भी कम हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में हर राज्य में रोड सेफ्टी कमेटी बनी है। हिमाचल में भी यह कमेटी अब कुछ कदम हादसे रोकने को उठा रही है, लेकिन हादसे कब और कैसे रुकेंगे? इस सवाल का जवाब अब तक मिला नहीं है।

सड़क हादसे,                        मौत और वजह

वर्ष                   हादसे              मौतें              मानवीय भूल

2015               3015               1096              90.10%
2016               3153                1163              92.23%
2017               3114                1202              95.73%
2018               3110                1206             95.50%
2019*             0662               029               93.61%

(*2019 के आंकड़े अप्रैल माह के हैं)

निजी बसों की निगरानी बढ़ाएगा विभाग

परिवहन निदेशक कैप्टन जेएम पठानिया ने कहा कि बंजार हादसे में बस ओवरलोड थी, यह प्रमाणित हो चुका है। बाकी कारणों का पता जांच के बाद चलेगा। लेकिन एहतियातन सभी आरटीओ को आदेश दिए गए हैं कि वे निजी बस ऑपरेटरों के साथ बैठक कर उन्हें निर्देश दें कि आरटीओ का नंबर हर बस में लगाया जाए, ताकि खराब ड्राइविंग, बस की हालत खराब होने या अन्य तरह की लापरवाही की सूचना सवारियां दे सकें।

मृतकों की सूची

पुष्पा देवी पत्नी मोहन लाल (25), विशन सिंह पुत्र आलम चंद (42), चांदनी पुत्री बृज लाल (20), मीना देवी पुत्री ईश्वर दास (22), आदित्य शर्मा पुत्र ओम प्रकाश (22), चरण सिंह पुत्र दयाराम (54), डोला पुत्र परमानंद (56), रवजान सिंह पुत्र केशव राम (75), चंपा पत्नी महेद्र सिंह (26), बस परिचालक छोटू, यशपाल पुत्र गुमत (36), सेस राम पुत्र तुले राम (80), पूर्णचंद पुत्र गुरदयाल सिंह (24), कांता देवी पत्नी डावे राम (26), रमेश चंद पुत्र भूप सिंह (20), दुर्गा देवी पत्नी कजार सिंह (38), पंतू देवी पत्नी धर्मदास (62), मोहन लाल पुत्र खेख राम (42), शांगरी देवी (75), सीता राम पुत्र रूप दास (45), खीम सिंह पुत्र जगत राम (60), यमुना देवी पुत्री जगत राम (18), दिनानाथ पुत्र ठाकुर दास (60), दिनेश पुत्र मोहन लाल (4), सेस राम पुत्र निरज सिह (68), पन्ना लाल पुत्र भिम सेन (3), रीता देवी पत्नी तापे राम (31), कुसुम लता पुत्री गुरदयाल सिंह (20), धनेश्वरी पुत्री खेम चंद (19), जाहनवी पुत्री मोहन लाल (10), हिंतेद्र पुत्र देवकीनंदन (26), हिना देवी पुत्री दलीप सिंह (20)।

(खबर लिखे जाने तक कई मृतकों की शिनाख्त नहीं हो पाई थी। )

Career Counsling

Get free career counsling and pursue your dreams