Bhootnath temple

Bhootnath temple धूपबती का खर्चा के लिए भी लेने पड़ रहा है कर्जा

हिमाचल दस्तक,मंडी।। मंडी शहर के प्राचीन Bhootnath temple में व्यवस्था चलाने के लिए मंहत को कर्ज लेने पड़ रहे है । जबकि मंदिर में लाखों रूपए का चढ़ावा चढ़ रहा है । मगर अचरज की बात यह है कि जिस बाबा भूतनाथ को लाखों रूपये का चढा़वा चढ़ रहा है । उसका मंहत मंदिर की व्यवस्था के लिए कर्जदार हुए जा रहा है।

  • नहीं होते है अब शानो शौकत वाले उत्सव और त्यौहार
  • 11 महीनों से गल्ले से मंहत को नहीं मिला एक भी रुपया  
  • मंहत का गल्ले मेंं 40 प्रतिशत का हिस्सा

जानकारी के अनुसार पिछले 11 महीनों से मंदिर के गल्ले से मंदिर के मंहत को एक रुपया भी नहीं मिला है । जबकि मंहत का गल्ले मेंं 40 प्रतिशत का हिस्सा है। जिस पैसे से मंदिर की व्यवस्था का संचालन होना था । मंहत की इस व्यथा को सुनने वाला कोई नहीं है। जबकि सरकारी तौर पर इस मंदिर का अधिग्रहण तो प्रशासन ने कर रखा है।

बिना काम हिस्सा मिलने वाले कर रहे ऐश

मगर प्रशासन को मंदिर के गल्ले से मतलब है। मगर व्यवस्था को कैसे सुधारा जाए उसकी फिक्र नहीं है। जब से इस मंदिर का सरकारी करण हुआ है तब से सारी व्यवस्था ही लडख़ड़ा गई है । जिन लोगो को बिना काम से हिस्सा मिल रहा है वे तो ऐश कर रहे है । मगर मंदिर में धूप बती जलाने के लिए भी कर्जा लेना पड़े तो बड़ी शर्म की बात है कि प्रशासन किस हक से गल्ले को ले जा रहा है।ये आरोप किसी और ने नहीं मंहत देवानंद सरस्वती ने लगाए है ।

नहीं खुलता गल्ला सार्वजनिक तौर पर

मंहत ने बताया कागजों में तो लाखों रूपए की कमाई दिखाई देती है । मगर असल में कितनी कमाई हुई है । उसका पता चंद लोगों को है । उन्होंने कहा कि जब गल्ले में मंदिर के मठ का हिस्सा है तो फिर कमाई भी सार्वजनिक होनी चाहिए । उन्होंने कहा कि उत्सवों में साज सज्जा से लेकर आयोजन का खर्चा करने के लिए प्रशासन एक रूपए नहीं देता है । जबकि इन सब पर खर्चा करने के लिए कर्जा लेना पड़ रहा है ।

क्या कहता है प्रशासन

इस बारे में मङ्क्षदर अधिकारी व तहसीलदार मंडी गोपाल सिंह कटारिया ने कहा कि मामला कोर्ट में लंबित है । इसलिए वे कुछ नहीं कह पाएंगे । उन्होंने कहा कि कोर्ट से जो भी निर्णय आता है उसे लागू कर दिया जाएगा । जहां तक धूपदीप के खर्चे की बात है उसके लिए प्रशासन पहले भी खर्चा नहीं देता था ।

आखिर क्या है भूतनाथ का महत्व

भूतनाथ मंदिर से ही मंडी शिवरात्रि का आगाज होता है। राजा अजबर सेन ने इस मंदिर का निर्माण 1527 ईस्वी में किया था । करीब चार सौ साल पुराने इस मंदिर की व्यवस्था मठ के द्वारा की जा रही है। मगर अब इस मंदिर का सरकारीकरण होने के बाद यह मंदिर प्रशासन के पास आ गया है। मंडी शहर ही नहीं बल्कि पूरे जिले के देवी देवता जब यहां से गुजरते हैं। शीश निवाने भूतनाथ जरूर जाते है । यहीं नहीं देश विदेश से भी पर्यटक भूतनाथ के मंदिर में जरूर आते है।

 

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