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सुविधाओं के अभाव में परेशानियां झेल रहे श्रद्धालु

हिमाचल दस्तक। कंदरौर
प्रदेश के लाखों दावों एवं तमाम कोशिशों के बावजूद भी बिलासपुर में धार्मिक स्थल पर्यटन की दृष्टि से विकसित नहीं हो पा रहे हैं। जिनका लाभ न तो स्थानीय लोगों को मिल पा रहा है और न ही श्रद्धालुओं को मिल पा रहा है। इसी के चलते जिले की ग्राम पंचायत जांगला के गांव रपैड़ में स्थित सुप्रसिद्ध माता रूकमणी कुंड मंदिर में पर्याप्त सुविधाओं के आभाव में यहां आने वाले श्रद्धालुओं को कई परेशानियों मेें जूझना पड़ रहा है। बल्कि सरकार की उपेक्षा का शिकार हो रहा है।

गौरतलब है कि इस मंदिर का इतिहास माता रूकमणी के बलिदान से जुड़ा हुआ है । ये मंदिर सरकारी उपेक्षा का शिकार होकर अपनी वेबसी पर आंसू बहा रहा है। हालांकि इस मंंदिर को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की कई बार योजनाएं बनाई गई लेकिन आज तक कुछ नहीं हो पाया। जिससे क्षेत्र के हजारों लोगों ने जिला प्रशासन व सरकार के प्रति गहरा रोष व्याप्त है। काबिले गौर है कि इस मंदिर को जोडऩे वाली औहर से वाय हीरापुर रूकमणी कुंड मंदिर सड़क की हालत ब्यान करने योगय नहीं है। क्योंकि इस सड़क के बीचों बीच इतने गहरे -गहरे गड्ढे पड़े है कि इस पर वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं है। यहां कई श्रद्धालु गिरकर घायल हो चुके है ओर लोकनिर्माण विभाग मूकदर्शक बना हुआ है और किसी बड़े हादसे के इंतजार में है।

कुंड का पानी चरम रोग के लिए बहुत ही उपयोगी

इस मंदिर का निर्माण कई दशक पूर्व किया गया । इस बीच कई सरकारें आई और गई लेकिन फिर राजनीतिक दलों के नेताओं ने सिर्फ लोगों को गुमराह करके यहां से वोट बटोर के विधानसभा व लोकसभा में अपनी राजनीति चमकाई लेकिन दशकों बाद भी इस मंदिर की हालत सुधारने की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

हालांकि इस मंदिर में अप्रैल माह में यहां जांगला पंचायत की तरफ से बैशाखी पर्व पर तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है और यहां दूरदराज के क्षेत्रों से हजारों की सं या में श्रद्धालु इस पवित्र कुंड में स्नान करने के उपरांत माता का आर्शीवाद प्राप्त करते है इस कुंड का पानी चरम रोग के लिए बहुत ही उपयोगी है लेकिन यहां सरायें की व्यवस्था न होने से यहां श्रद्धालुओं को रात गुजारने में भारी परेशानी होती है ।

वहीं शौचालय की कमी के चलते महिला को विशेषकर खुले में शौच जाने में भारी परेशानी उठानी पड़ती है । समोह पंचायत के प्रधान अनिल कुमार व जांगला पंचायत के प्रधान अश्वनी चंदेल के प्रयासों से इस कुंड के इर्द-गिर्द लोहे की रेलिंग तो लगा दी लेकिन सुविधाएं मुहैया करवानी किसी ने उचित नहीं समझी।

वहीं मंदिर को जाते वक्त बीच में गहरा नाला होने के कारण बरसात के दिनों में श्रद्धालुओं को अपनी जान जोखिम में डालकर मंदिर तक पहुंचाना पड़ता है। बसपा नेता सरदार प्यार सिंह, बड़ोल पंचायत के पूर्व प्रधान रंगील सिंह वर्मा सहित अन्यों का कहना है कि जिला प्रशासन व प्रदेश सरकार इस धार्मिक तीर्थ स्थल की तरफ ध्यान दे तो सरकार को लाखों रूपयों की आय हो सकती है । व स्थ्रानीय लोगों को रोजगार के अवसर पर भी प्राप्त हो सकते हैं।

रिपोर्टर – भूपेश चंदेल

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