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पांच साल से पुरानी गाड़ी नहीं चलेगी स्कूलों के लिए

  • मोटर व्हीकल रूल्स को इस अनुसार बदलेगी सरकार
  • बस और ड्राइवर का फिटनेस टेस्ट नए सिरे से होगा
  • बसों में होंगे स्पीड गवर्नर, 40 किमी प्रति घंटा स्पीड तय
  • नूरपुर हादसे के बाद कैबिनेट ने लिया सख्त फैसला

राजेश मंढोत्रा। शिमला
नूरपुर स्कूल बस हादसे से सबक लेते हुए राज्य सरकार स्कूल बसों को लेकर कड़े फैसले लिए हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में स्कूलों के परिवहन वाहनों के सुरक्षित संचालन के लिए दिशा-निर्देशों को मंजूरी दी गई। इन निर्देशों के अनुसार अब राज्य में पांच साल से पुरानी बसें या टैक्सियां स्कूली बच्चों के लिए नहीं लगेंगी। इन बसों के अंदर सीसीटीवी जरूरी होगा और बस में जीपीएस लगेगा ताकि बच्चे के अभिभावक भी बस की मूवमेंट का पता कर सकें। इस जीपीएस को बाद में मोबाइल ऐप से जोड़ा जाएगा, जिसे परिवहन विभाग बनाने जा रहा है।

इसी GPS से ओवरस्पीड बस या स्कूल टैक्सी का संदेश लोकल पुलिस स्टेशन को खुद चला जाएगा। स्कूल बस पर ड्राइवर और मालिक का नंबर जरूरी होगा। 60 साल से अधिक उम्र का व्यक्ति ड्राइवर नहीं हो सकेगा और चालक के पास हैवी व्हीकल चलाने का कम से कम 5 साल का अनुभव होना चाहिए। सभी स्कूल बसों को अगले तीन महीने में सभी तरह की जांच नए सिरे से करवानी होगी। इसमें बस ड्राइवर की मेडिकल जांच भी शामिल है। बस पीले रंग की हो और HRTC बस पर बड़े अक्षरों में स्कूल बस लिखा हो।

आगामी 10 दिनों के भीतर इन बदलावों के अनुसार मोटर व्हीकल रूल्स में भी संशोधित किया जाएगा

इन निर्देशों में कुल 21 प्वाइंट्स हैं, जो बच्चे की सेफ्टी के लिए हैं। जबकि 14 प्वाइंट स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के लिए हैं, जिनका ध्यान उन्हें रखना हैं। इन निर्देशों को वैधानिक रूप देने के लिए परिवहन विभाग इन पर अब लोगों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगेगा और इसके बाद अधिसूचना जारी कर इनका पालन सुनिश्चित किया जाएगा। आगामी 10 दिनों के भीतर इन बदलावों के अनुसार मोटर व्हीकल रूल्स में भी संशोधित किया जाएगा।

यह निर्णय भी लिया गया कि परिवहन विभाग मुख्यमंत्री की ओर से सभी निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को पत्र भेजेगा, जिसमें परिवहन सुरक्षा दिशा निर्देशों के बारे में जानकारी होगी। गौरतलब है कि नूरपुर बस हादसे में 28 लोगों की मौत हो गई थी और इनमें से 24 स्कूल बच्चे थे। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर रिपोर्ट देने को कहा था। कमेटी ने कैबिनेट में रिपोर्ट रखी और मंगलवार को हाईकोर्ट में भी यह रिपोर्ट रखी जाएगी।

विद्या उपासकों को पैट के बराबर वेतन

मंत्रिमंडल ने प्राथमिक सहायक अध्यापकों की तर्ज पर प्रारंभिक शिक्षा विभाग में कार्य कर रहे ग्राम विद्या उपासकों के लिए स्थानांतरण नीति तैयार करने के साथ प्रतिमाह 21500 रुपये का मानदेय, तीन प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि 12 दिनों का आकस्मिक अवकाश तथा 10 दिनों का चिकित्सा अवकाश प्रदान करने का निर्णय लिया। छूटे हुए ग्रामीण विद्या उपासकों को पैट के समान 21500 रुपये प्रतिमाह मानदेय तथा 3 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि प्रदान करने का भी निर्णय लिया गया।

स्मार्ट सिटी में नई भर्ती को मंजूरी

मंत्रिमंडल ने स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत शिमला तथा धर्मशाला स्मार्ट सिटी को क्रमश: 2906 करोड़ रुपये तथा 2105 करोड़ रुपये के कार्यों के निष्पादन के लिए विशेष प्रयोजन वाहन में विभिन्न पदों के सृजन तथा इन्हें भरने का निर्णय लिया। शिमला स्मार्ट सिटी के लिए विभिन्न श्रेणियों के 24 पदों को सेकंडमेंट आधार पर तथा 26 पदों को आउटसोर्स आधार पर भरा जाएगा। इसी प्रकार, धर्मशाला स्मार्ट सिटी के लिए भी सेकंडमेंट तथा आउटसोर्स आधार पर इतने ही पद भरे जाएंगे।

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