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डिमोट होंगे पूर्व सैनिक कर्मचारी, पर पे प्रोटेक्शन मिलेगी, 2 साल से लटके मामले में फैसला लिया जयराम सरकार ने

राजेश मंढोत्रा। शिमला : राज्य के सरकारी महकमों में कर्मचारियों एवं अधिकारियों की वरिष्ठता अब वर्ष 2008 के आधार पर तय होगी। 29 दिसंबर, 2008 को मौजूद स्थिति के हिसाब से ही अब सीनियोरिटी लिस्ट बनेगी और पूर्व सैनिक कर्मियों को सेना के सेवाकाल की वरिष्ठता नहीं मिलेगी। जयराम सरकार ने दो साल चार महीने से लंबित इस मसले पर फैसला ले लिया है।

मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर लग गई। अब सभी महकमों को इस बारे में लिखित निर्देश जारी होंगे। गौरतलब है कि सितंबर, 2017 में सुप्रीमकोर्ट ने पूर्व सैनिक कर्मचारियों को सिविल में वरिष्ठता देने के कानून को यह कहते हुए रद कर दिया था कि सेना में जाना अब इमरजैंसी नहीं, बल्कि मैटर ऑफ च्वाइस है। इसलिए इस सेवाकाल की सिविल में वरिष्ठता नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि पूर्व सैनिकों के लिए राज्य में भर्ती कोटा तय है। इसके बाद सेना के सेवाकाल की वरिष्ठता देना संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार का उल्लंघन होगा।

इस फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश डिमोब्लाइज्ड आम्र्ड फोर्सिस पर्सनल (रिजर्वेशन आफ वेकेंसीज इन हिमाचल प्रदेश स्टेट नॉन टेक्निकल सर्विसिज) रूल्स 1972 का रूल 5.1 खत्म हो गया। इससे पहले राज्य हाईकोर्ट ने 29 दिसंबर, 2008 को भी यही फैसला दिया था। इसी आधार पर 30 जनवरी, 2018 को कार्मिक विभाग ने सभी महकमों को इसी अनुसार निर्देश जारी किए। शिक्षा विभाग समेत कई विभागों ने इसके बाद यह तर्क ले लिया कि जब वरिष्ठता देने का कानून ही नहीं है तो इसे शुरू से ही खत्म माना जाए।

इसके बाद कई पूर्व सैनिक कर्मियों की डिमोशन होने लगी। दबाव बढऩे के बाद प्रबोध सक्सेना के कार्मिक सचिव रहते हुए सरकार ने इस प्रक्रिया को होल्ड कर दिया था। लेकिन कई महकमें कार्मिक विभाग से इस बारे में जवाब मांग रहे थे कि किस डेट से डिमोशन करें या इस निर्णय को लागू करें? इसलिए अब दोबारा से यह केस कैबिनेट के सामने रखा गया।

यह कहा जयराम कैबिनेट ने

कैबिनेट ने कहा है कि सुप्रीमकोर्ट का ऑर्डर 29 दिसंबर, 2008 को मौजूद स्थिति के आधार पर लागू होगा। यानी इससे पहले जिसे वरिष्ठता मिली है, वह नहीं छेड़ी जाएगी। इसके बाद इसी अनुसार वरिष्ठता बदली जाएगी। पूर्व सैनिक कर्मियों को इस वित्तीय नुकसान नहीं होगा, क्योंकि पे प्रोटेक्शन सरकार ने पहले ही दे दी है। अब कैबिनेट से इस फैसले के मिनट्स आने के बाद कार्मिक विभाग नए सिरे से निर्देश जारी करेगा।

वीरभद्र सरकार ने यह किया

कोर्ट के फैसले के आधार पर पूर्व कांग्रेस सरकार के समय कार्मिक विभाग ने यही निर्देश जारी किए थे, लेकिन तब के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इन्हें लागू होने से पहले रोक दिया था। केस चूंकि करीब 17 साल से कोर्ट में था, इसलिए पूर्व फौजी बनाम गैर फौजी कर्मचारी इस पर दबाव डाल रहे थे। हालांकि सुप्रीमकोर्ट में सरकारों ने गैर फौजियों के पक्ष में ही बात रखी। राज्य में वर्तमान में 35 हजार से ज्यादा पूर्व सैनिक कर्मचारी हैं।

 

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