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स्वरोजगार – कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने दिखाया रास्ता

कमल शर्मा। शाहतलाई
परंपरागत खेती छोड़ कर किसान अपनी उपजाऊ जमीन को बंजर बनाने पर तुले हुए हैं वहीं, क्षेत्र के किसान को मिले परामर्श से अब बंजर जमीन भी सोना उगलने लगी है। ऐसा ही मामला ग्राम पंचायत घंडीर के गांव जमराडियां में देखने को मिला। जहां एक किसान ने व्यवसायिक खेती कर अपने क्षेत्र में एक मिसाल पैदा कर दी है।

गौरतलब है कि ग्राम पंचायत घंडीर के गांव जमराडियां के निवासी रमेश शर्मा का कहना है कि एक छोटे से परामर्श ने आज उनकी तकदीर ही बदल दी। जिस कारण उन्हें एक अलग पहचान मिली। रमेश शर्मा ने बताया कि उनके गांव के चारों ओर घना जंगल होने के कारण हर समय जंगली जानवरों का बसेरा बना हुआ था। हम सिर्फ गेहूं और मक्की की फसलों तक ही सीमित थे और जानवर फसलों को उजाड़ देते थे। अन्य फ सलों के उत्पादन के बारे में कभी सोचा ही नहीं।

अपनी उपजाऊ जमीन पर खेती करने का दायरा कम कर दिया। हालांकि खेती से जुड़े रहने के लिए कृषि विभाग व कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञों के शिविरों में जाकर मिली जानकारी से उन्होंने एक बार फिर से खेती करने का मन बनाया। इसका नतीजा मिला कि जो किसान अपनी उपजाऊ जमीन पर खेती करने का दायरा कम दिया था आज उसी जमीन पर कम लागत से अधिक मुनाफा कमाकर मालामाल हो गया है।

रमेश शर्मा ने बताया कि इस से पूर्व उन्होंने लुधियाना (पंजाब) में हौजरी का काम भी किया है

रमेश शर्मा का कहना है कि जब उपर वाले की मेहरबानी होती तो हर मुश्किल भी आसान हो जाती है। उन्होंने बताया कि इस गांव में सिंचाई की कोई भी व्यवस्था नहीं थी, पर कृषि विभाग के सौजन्य से व पंचायत प्रतिनिधियों के प्रयासों से यहां पर जायका की स्कीम आई और लोगों को सिंचाई सुविधा मिलने लगी। इसके पश्चात उन्होंने कृषि विभाग के माध्यम से एक पॉलीहाउस लगाया और सब्जियों का काम किया लेकिन थोड़ा बहुत मुनाफा होने लगा। शर्मा ने बताया कि सब्जियों में लगी बीमारियों के कारण कृषि विज्ञान केंद्र बरठीं के सब्जी विशेषज्ञ डॉक्टर रविंद्र कुमार से हुई मुलाकात ने खेती को नई दिशा ही दे दी।

उन्होंने बताया उस वक्त धीरे-धीरे कृषि विज्ञान केंद्र के अन्य विशेषयज्ञों में डॉक्टर संजय दालों व तिलहन, डॉक्टर वर्मा बीमारियों के विशेषज्ञों के परामर्श के अनुसार सब्जी उत्पादन करने का मन मना लिया है। इसका परिणाम आज देखने को मिल रहा है। सब्जी विशेषज्ञ डॉक्टर रविंद्र कुमार ने उन्हें बरसाती प्याज, करेला, लौकर, चुुकंंदर मूली, हरा धनिया सहित अन्य सब्जियांं उगाने के लिए प्रेरित किया।

रमेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने केवीके के वैज्ञानिकों के परामर्श के बाद इन सब्जियों का उत्पादन किया और पिछले चार साल से प्याज, धनिया, मैथी, अजवाइन, तिल, माश, रौंगी, देशी मसर, हरहर आदि की खेती कर मुनाफा कमा रहे हैं। इतना ही नहीं बल्कि साल प्याज की दो फसलें ले रहे हैं। रमेश शर्मा ने बताया कि इस से पूर्व उन्होंने लुधियाना (पंजाब) में हौजरी का काम भी किया है। लेकिन मुनाफा होने के बजाय कर्ज बढ़ता गया, लेकिन बिशेषज्ञों के परामर्श ने उनकी तकदीर ही बदल और उन्हें नई पहचान दी है।

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