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तीन दिन से जगह-जगह रोके जा रहे थे वाहन

  • रामपुर में स्थानीय लोगों से बहस के बाद हुआ खुलासा
  • राजनीतिक दबाव के चलते नहीं हुआ मामला दर्ज

चंद्रमोहन चौहान। ऊना
नकली अधिकारी बनकर रौब दिखाने के कई मामले तो आपने सुने होंगे, लेकिन नकली आरटीओ बनकर वाहनों की तीन दिनों तक चेकिंग करने की बात नहीं सुनी होगी। जी हां, ऊना मुख्यालय के रामपुर-संतोषगढ़ रोड पिछले तीन दिनों से नकली आरटीओ व कर्मचारी बनकर वाहनों की चेकिंग की जा रही थी।

मामले का खुलासा स्थानीय लोगों की सतर्कता से हुआ, जो कुछ दिनों से इन लोगों की गतिविधियों को देख रहे थे। शक होने पर लोगों ने पूछताछ की, तो मामले का भंडाफोड़ हुआ। इस पूछताछ के दौरान स्थानीय लोगों व जाली आरटीओ के बीच बहस हुई और बाद में मारपीट तक मामला पहुंच गया।

मारपीट के बीच पुलिस को मौके पर बुलाया गया। पुलिस टीम ने इस मामले में पूछताछ की और दोनों पक्ष से जानकारी जुटाई। इसी बीच कि पुलिस अगामी कार्रवाई करती किसी रौबदार पहुंच वाले राजनीतिक साहिब का फोन आ गया और मामले में समझौता कर मामले को रफा-दफा कर दिया। अब पुलिस कुछ भी खुलासा करने से बच रही है।

बता दें कि रामपुर-संतोषगढ़ मार्ग पर पिछले तीन दिनों से नकली आरटीओ अधिकारी व कर्मचारी बनकर वाहनों की चेकिंग कर रहे थे।

इन युवकों ने बकायदा वाहनों की चेकिंग के लिए दो स्कॉर्पियों व हैंडलाइट्स भी रखी थी। नकली अधिकारी बन युवक कभी रामपुर, कभी पेखूवेला तो कभी नंगड़ा में नाकेबंदी लगाकर वाहन चेक करते थे। वाहन चेकिंग का सिलसिला शाम ढलने के बाद से शुरू होता था, जो काफी घंटों तक चलता रहता था।

हैरानी की बात तो यह है कि इसी रोड से कुछ दूरी पर पूरा जिला प्रशासन बैठता है, जिनकों इसकी भनक तक नहीं लगी। पता चला है कि नकली आरटीओ बनने वाले युवा मुख्यालय के साथ लगते गांव के ही हैं।

पुलिस चौकी में राजनीतिक दबाव के चलते दोनों पक्षों में समझौता होने के बाद मामला रफादफा कर दिया गया। पुलिस अधीक्षक दिवाकर शर्मा ने कहा कि भर्ती के चलते कुछ व्यस्तता चल रही है, लेकिन मामले को लेकर कुछ जानकारी जरूर मिली थी। पता चला था कि मामले में दोनों पक्षों का समझौता हो गया है। इससे ज्यादा जानकारी नहीं है। पुलिस ऐसे मामले में पूरी तरह से सतर्क है और हर ऐसे व्यक्ति पर नजर रखी जाएगी।

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