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लड़के और लड़की के परिवार वालों की काउंसलिंग

बालिग होने तक शादी न करने को मनाए परिजन

हिमाचल दस्तक। श्रीरेणुकाजी
चाइल्ड लाइन की टीम ने श्रीरेणुकाजी के बडग और घाटों में हुए दलित समुदाय के नाबालिगों के विवाह को रुकवाया है। वहीं, लड़का और लड़की के अभिभावकों की काउसलिंग कर विवाह बालिग होने तक के लिए टाला गया है। चाइल्ड लाइन की सदस्या विनिता ठाकुर ने बताया कि टीम को 1098 से क्षेत्र में नाबालिगों के विवाह की सूचना मिली। इस पर टीम ने उक्त क्षेत्र मे जाकर छानबीन शुरू की। टीम सदस्यों ने बताया कि इस नाबालिग विवाह में लड़के की उम्र 17 वर्ष तथा लड़की की उम्र 15 वर्ष है।

इनके बाकायदा उम्र के प्रमाणपत्र टीम ने प्राप्त कर लिए हैं। चाइल्ड टीम ने इस दौरान लड़के के घर पर पहुंचकर पता लगाया तो लड़की लड़के के घर पर ही मिली। इसके बाद टीम ने लड़की को उसके घर साथ लाकर लड़की के माता-पिता की भी बाकायदा काउंसलिंग कर दोनों के नाबालिग होने तक के लिए विवाह बंधन मे न बंधने की भी जानकारी दी। यह सभी प्रक्रिया बाकायदा पंचायत प्रधान गनोग गोबिंद को भी साथ लेकर की गई। चाइल्ड लाइन की टीम द्वारा नाबालिग विवाह में लड़की रेणुका के गनोग की है, जबकि लड़का घाटो गांव का है।

गौर हो कि इसी माह में यह दूसरा मामला चाइल्ड लाइन की टीम ने रेणुका क्षेत्र मे यह पकड़ा है

इनका विवाह अब बालिग होने तक के लिए टाला गया है। गौर हो कि तमाम जागरुकता के बाद भी अवस्यक लड़के-लड़कियों के विवाह के मामले क्षेत्र में थम नही रहे हंै। साफ तौर पर सरकार और संबंधित विभाग जागरुकता के दावे कर यह जानकारी देते है कि कानूनन विवाह में लड़की की उम्र 18 वर्ष जबकि लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। मगर चाइल्ड लाइन टीम अकसर ऐसे मामले उजागर करती आ रही है।

इसमें नाबालिग महज 14 या 15 वर्ष की उम्र मे भी विवाह के बंधन मे बंधते जा रहे हैं। हैरानी इस बात की भी है कि यह विवाह लड़के और लड़की के अभिभावकों की सहमति से ही हो रहे हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस स्तर की जागरुकता में आज भी दलित समाज जी रहा है। गौर हो कि इसी माह में यह दूसरा मामला चाइल्ड लाइन की टीम ने रेणुका क्षेत्र मे यह पकड़ा है। इस दोरान चाइल्ड लाइन टीम के सदस्य राजेंद्र सिंह भी मौजूद रहे।

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