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Claims before the results in BJP and Congress in Kuttlahad

वीरेंद्र मजबूत तो कांग्रेस में फिर खड़ी हुई फौज

राम सिंह, लठियाणी।   चुनावों के बाद जैसे ही एग्जिट पोलिंग ने चारों ही सीटें भाजपा के नाम बताई तो भाजपा के कार्यकर्ताओं के चेहरों पर खुशी दिखी, दूसरी तरफ  कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के चेहरों पर मायूसी रही।  कुटलैहड़ में बेशक कांग्रेस पिछले कई वर्षों से जीत का स्वाद नहीं चख पाई है। अब देखना यह है कि कुटलैहड़ में 16 वर्षों से चलती आ रही वीरेंद्र कंवर की सरदारी इस बार क्या रंग दिखाएगी।

एक तरफ भाजपा के कार्यकर्ताओं ने जहां पर कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र कंवर के नेतृत्व में बड़ी लीड दिलवाने की घोषणा की है, वहीं पर दूसरी तरफ  कांग्रेस के टिकटार्थियों ने इस बार कुटलैहड़ से लीड दिलवाने का दम भरा है और एकजुटता व विश्वास का दावा किया है। कांग्रेस के इतिहास की बात करें तो तो कांग्रेस को सरला शर्मा ने एकजुटता से पिरोए रखा और उनके बाद पंडित राम नाथ शर्मा के लंबे समय तक कांग्रेस की कमान संभाली रखी। 1998 में कांग्रेस की टिकट पंडित रामनाथ शर्मा के स्थान पर राजा महेंद्र पाल को देने के बाद कांग्रेस की कड़ी ऐसी बिखरी कि आज दिन तक जुड़ नहीं पाई है।

कुटलैहड़ में कांग्रेस ने नए-नए प्रयोग किए है, जोकि कारगार साबित नहीं हो पाए। कुटलैहड़ क्षेत्र में लगातार 6 बार कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा हैरानी की बात यह है, दो बार स्वर्गीय राम दास ने भाजपा का झंडा और चार बार लगातार वीरेंद्र कंवर ने हल्के में अपनी पैठ साबित की है। कुछ बुद्धिजीवी लोगों का कहना है की लहर में देखा जाए तो कांग्रेस का सबसे ज्यादा वोट बैंक था जैसे ही भाजपा की कमान वीरेंद्र कंवर ने संभाली धीरे धीरे कांग्रेस को वह भाजपा में शामिल करते गए।

बिना किसी भेदभाव से दूसरी तरफ  कांग्रेस के नेताओं की लंबी लिस्ट होती गई यह लिस्ट अपना इन चुनावों में क्या रंग दिखाती है यह समय बताएगा। कांग्रेस के प्रत्याशी रहे विवेक शर्मा, पूर्व  ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रविंद्र फौजी, कर्नल धर्मेंद्र पटियाल, विजय डोगरा, प्रवीण शर्मा, देशराज मोदगिल बलदेव कुटलैहडिया, देशराज गौतम सहित कई नेता टिकट के लिए जद्दोजहद करते रहे इस चुनाव में भी यह सक्रिय रहे।

अब देखना यह है कि यह कांग्रेस के नेता अपना कितना जनाधार दिखाते हैं। युवाओं में रणवीर राणा व  देवेंद्र भुट्टो जिन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। कुल मिला 23 मई को पता चलेगा कि वीरेंद्र कंवर की सरदारी में किला फतह हुआ या कांग्रेस के योद्धाओं किले में सेंधमारी कर सके।

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