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मुख्यमंत्री का धर्मशाला दौरा त्वरित टिप्पणी

मुख्यमंत्री के स्वागत में कपूर और पठानिया को छोड़ बाकी नहीं जुटा पाए भीड़

प्रधान संवाददाता। धर्मशाला
दशकों से शांता-धूमल की धुरी पर घूमने की आदी रही जिला कांगड़ा की सियासी जमीन पर सोमवार को जब भाजपा के नए सीएम रूपी युग पुरुष जयराम ठाकुर उतरे तो सियासत भी चक्करघिन्नी की तरह घूमती नजर आई। दरअसल सोमवार को कांगड़ा जिले में दो बातों को लेकर जयराम सरकार की जबरदस्त चर्चा हो रही थी। पहली चर्चा इस बात की थी कि जयराम ठाकुर अपनी सत्तापक्ष की टीम के साथ बैठक किसी आलीशान होटल में न करके धर्मशाला के सचिवालय में करेंगे।

जबकि सत्ता से दूर हुई कांग्रेस के विधायक दल की बैठक पर्यटन विभाग के आला होटल धौलाधार में हुई। लोग चटखारे लेते हुए यह कह रहे थे कि देखो जयराम ने जमीन नहीं छोड़ी है। खर्चों में कटौती को लेकर पहले ही विधानसभा सत्र में अपनी सोच का जलवा दिखा दिया। एक कांग्रेस है जो अभी तक अपनी ठसक को नहीं त्याग पाई है।

CM का हेलिकॉप्टर धर्मशाला के बजाए गग्गल में लैंड करवाने को लेकर भी सियासी प्लानिंग थी

एयरपोर्ट पर जयराम ठाकुर का इस्तकबाल कांगड़ा की सियासत के भीष्म पितामह माने जाने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता और सांसद शांता कुमार ने किया। खुद सियासी कांटों की शैय्या पर लेटे शांता कुमार ने जयराम का स्वागत फूलों के साथ किया। यह भी कई संकेतों का जनक है। अगर एयरपोर्ट पर नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया और धर्मशाला में किशन कपूर के नूर की तूती नहीं बोलती, तो यह स्वागत भी सियासी चर्चा की वजह बन जाता।

CM का हेलिकॉप्टर धर्मशाला के बजाए गग्गल में लैंड करवाने को लेकर भी सियासी प्लानिंग थी। एयरपोर्ट से धर्मशाला तक स्वागत के लिए सभी मंत्री विधायकों को भीड़ जुटानी थी। पर ऐसा नहीं हो पाया। इसके बाद जब काफिला आगे बढ़ा तो कांगड़ा विधानसभा क्षेत्र वालों ने भी भीड़ का जुगाड़ गगल के उस बस स्टॉप पर किया जो अक्सर जाम का शिकार रहता है।

जगह-जगह तोरण द्वारों पर उमड़ी भीड़ ने जयराम की जय-जयकार करवा दी

रेडीमेड भीड़ से ओर्जिनल प्रदर्शन हो गया। एयरपोर्ट पर राकेश पठानिया संग आए कार्यकर्ताओं के बाद आगे किशन कपूर ने ऐसे हालात बनाए हुए थे, जिनसे हालत में तगड़ा बदलाव देखने को मिला। जगह-जगह तोरण द्वारों पर उमड़ी भीड़ ने जयराम की जय-जयकार करवा दी। इन दो नेताओं की बदौलत सरकार की इज्जत की दौलत तो बच गई, लेकिन भविष्य के लिए कई सवाल मुख्यमंत्री के आगे खड़े हो गए हैं।

दरअसल, कांगड़ा की सियासत में जयराम के सामने उनके ही सिपहसिलारों ने अपनी कवायदों से ऐसे झंझावात खड़े कर दिए हैं जो कायदे से कम से कम इस अवसर पर खड़े नहीं होने चाहिए थे। हकीकत यह थी कि जयराम के इस्तकबाल में आरएसएस और ABVP का कैडर तो अपने आकार के लिहाज से मौजूद था, लेकिन भाजपा का कैडर गायब था।

जयराम बोल चुके हैं कि पीएम मोदी ने उन्हें अगले बीस साल तक सत्ता में बने रहने की ताकीद की है

इसकी वजह यह थी कि सरकार बनते ही यह पॉलिटिकल मैसेज चला गया है कि यह भाजपा की सरकार न होकर संघ और विद्यार्थी परिषद की हिस्सेदारी वाली सरकार है। जबकि हकीकत यह है कि भाजपा के अंदर एक ऐसा विशालकाय तबका उस भाजपा कैडर का है, जो किसी भी दौर में न तो आरएसएस का स्वयंसेवक है और न ही परिषद का उससे कोई नाता रहा है।

इस कैडर ने सिर्फ कमल के फूल को देखा और अपनाया है। ऐसे में इस तबके का अचानक गायब होना सही नहीं आंका जा सकता। हालांकि मौजूदा सरकार के सुप्रीमो जयराम ठाकुर को इस सियासत को 360 डिग्री पर घुमाना और सबको साथ में लेकर चलना एक चुनौती से कम नहीं होगा। यह इसलिए भी जरूरी होगा कि खुद जयराम यह बात भरी जनसभा में बोल चुके हैं कि पीएम मोदी ने उन्हें अगले बीस साल तक सत्ता में बने रहने की ताकीद की है। अब जयराम किस तरीके से भाजपा के इस कैडर को साथ में लेकर चलते हैं। यह देखने वाली बात होगी।

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