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प्रदेश कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष बोले, उत्पादक और उपभोक्ता के बीच की दूरी कम करना प्राथमिकता

आरडी पराशर। पच्छाद
पच्छाद विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के दुर्ग को तोड़कर लगातार दो बार भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभाने के इनाम में हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाल ही में वरिष्ठ भाजपा नेता बलदेव भंडारी को कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति दी है। बलदेव भंडारी ने इस जिम्मेदारी के लिए संगठन व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का आभार व्यक्त किया है। हिमाचल प्रदेश कृषि एवं विपणन बोर्ड का अध्यक्ष बनने के बाद बलदेव भंडारी की आगामी योजनाओं को लेकर बातचीत की गई। पेश हैं मुख्य अंश…

आपकी पहली प्राथमिकता बतौर कृषि विपणन बोर्ड अध्यक्ष क्या रहेगी?

उत्पादक और उपभोक्ता के बीच की दूरी को कम करना मेरी पहली प्राथमिकता रहेगी, ताकि पारदर्शिता के आधार पर किसानों को इसका सीधा लाभ मिल सके। यदि राज्य में विपणन की बात करें तो वर्ष 2003 के बाद राज्य में कोई भी प्रगति नहीं हुई है।

किसान मंडियों में किसानों के लिए क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध होंगी?

सरकार के सहयोग से प्रयास रहेगा कि प्रदेश में किसान मंडियों को अधिक से अधिक सुविधाजनक बनाया जाए। साथ ही किसानों के रहने की सुविधा के लिए किसान भवन और किसान विश्राम गृह का निर्माण करवाने पर बल दिया जाएगा। इसके अलावा जहां-जहां आवश्यकता होगी किसानों द्वारा नकदी फसलों को मंडियों तक पहुंचाने के लिए संग्रह केंद्र खोलने पर फोकस रहेगा।

बंदरों की समस्या, बंदूकों के लाइसेंस नवीनीकरण फीस वृद्धि व कम बीघा भूमि पर भी ट्रैक्टरों के पंजीकरण के लिए क्या योजना रहेगी ?

प्रदेश किसान मोर्चा की जिम्मेदारी पहले से ही संभाल रहा हूं। जिसमे हमने पहले ही बंदरों की विकराल समस्या से निपटने के लिए सरकार को काऊ सेंंक्चुअरी की तर्ज पर बंदरों के लिए भी प्रदेश के बड़े क्षेत्र में बंदर सेंक्चुअरी बनाने का सुझाव दिया है। इसमें बंदरों को पकड़ कर उनकी नसबंदी करके वहां रखा जाए।

प्रदेश के किसानों को फसलों का समर्थन मूल्य नहीं मिल पाता है। क्या कोई विशेष कार्य योजना अमल में लाई जाएगी?

यह सही है कि राज्य में फलों के अलावा चुनिंदा फसलों को ही अभी तक समर्थन मूल्य के दायरे में रखा गया है। प्रयास रहेगा कि किसानों की अधिकतर नकदी फसलों को समर्थन मूल्य के अंतर्गत लाया जाए।

सिरमौर की पारंपरिक नकदी फसल अदरक तीन दशक से सडऩ रोग की चपेट में है। इसके उत्थान को लेकर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। न ही अदरक का समर्थन मूल्य तय किया गया है।

यह बात सही है कि जिला सिरमौर की एक मात्र नकदी फसल अदरक से किसान मुंहमोड़ रहा है। लेकिन प्रयास रहेगा कि अदरक के सडऩ रोग को लेकर हिमाचल प्रदेश कृषि विवि और कृषि विभाग की मार्फत कोई विकल्प तलाशा जाएगा। साथ ही सरकार से बात कर अदरक को भी समर्थन मूल्य के दायरे में लाने का प्रयास किया जाएगा।

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