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Dalit community anger

गुस्साए लोगों ने संतोषगढ़ में किया चक्का जाम

  • ADM और DSP ने बहाल करवाया यातायात
  • स्कूल प्रधानाचार्य सहित 3 के खिलाफ मामला दर्ज 

हिमाचल दस्तक। संतोषगढ़

स्वर्गीय वीरेंद्र गौतम सीनियर सकेंडरी स्कूल (बाल) संतोषगढ़ में महर्षि वाल्मीकि जयंती समारोह में ब्लैक बोर्ड पर रामायण रचियता के बारे में अपशब्द लिखने का मामला तूल पकड़ गया है। शुक्रवार को वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद भीड़ ने संतोषगढ़-टाहलीवाल मार्ग पर चक्का जाम कर दिया। प्रदर्शनकारी स्कूल प्रशासन के खिलाफ एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की मांग कर रहे थे।

सूचना मिलने पर एडीएम सुखदेव सिंह, हरोली के डीएसपी नवदीप सिंह, ऊना सदर के एसएचओ प्रकाश चंद और हरोली थाना प्रभारी विश्वास वालिया दल बल के साथ मौका पर पहुंचे। अधिकारियों के समझाने और स्कूल प्रधानाचार्य समेत तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद ही लोगों ने यातायात बहाल होने दिया।

यह था घटनाक्रम

वाल्मीकि जयंती पांच अक्तूबर की थी। पांच अक्तूबर को सरकार अवकाश होने के कारण स्कूल में चार अक्तूबर को महर्षि वाल्मीकि की जीवनी पर लेखन कार्य करवाया गया। इस दौरान स्कूल के छात्रों ने ब्लैक बोर्ड पर महर्षि के जीवन से संबंधित बातों का उल्लेख किया। इस बीच महर्षि के जीवनकाल की एक घटना का जिक्र किया गया।

जिसमें एक ऐसे शब्द का प्रयोग हुआ, जिससे समुदाय की भावनाएं भड़क गईं और लोगों ने बवाल कर दिया। क्या कहते हंै डीएसपीडीएसपी हरोली नवदीप सिंह का कहना है कि जाम की सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर गई थी। पुलिस ने प्रधानाचार्य सहित तीन के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच को आगे बढ़ाया है।

आपत्तिजनक टिपण्णी लिखने पर निंदा

ऊना। संतोषगढ़ में भगवान वाल्मीकि के बारे में आपत्तिजनक टिपण्णी लिखने की गुरु नानक मिशन संस्था कड़े शब्दों में निंदा करती है। गुरु नानक मिशन संस्था के महासचिव हरपाल सिंह कोटला ने कहा कि केवल एक अध्यापक के खिलाफ  कार्रवाई कर मामला दर्ज करने से मामले का हल नहीं होगा। इसके साथ-साथ उन लोगों पर भी मामला दर्ज होना चाहिए, जिन लोगों की मंजूरी के बाद इन शब्दों को पाठ्य पुस्तकों में दर्ज किया गया है।

उन्होंने कहा कि बोर्ड की पुस्तकों सहित अन्य प्रकाशकों की पाठ्य पुस्तकों में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जो निंदनीय है। उन्होंने कहा कि अध्यापक तो वहीं पढाएगा जो पाठ्य पुस्तकों में दर्ज होगा। इसलिए आपत्तिजनक शब्दों को लिखने व प्रकाशन करने वालों पर भी मामला दर्ज किया जाना चाहिए और कार्रवाई होनी चाहिए।

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