News Flash
death graph rising

सड़क हादसों में इस साल मार्च तक ही 38 मौतें

देवेंद्र सूद। गगरेट
मौत के तांडव के आगे बेमौत मरने की सजा ऊना जिले की सड़कों पर भुगतना वाहन चालकों की नीयति में शुमार होकर रह गया है। पिछले साल के मुकाबले इस साल सड़क दुर्घटनाओं में इजाफा हुआ है तो वहीं अधिकतर नौजवान ही काल का ग्रास बन हैं। इसके लिए अब बेतरतीब यातायात प्रणाली को दोषी ठहरा लिया जाए या फिर वाहन चालकों की नादानी, लेकिन उन घरों के लिए यह साल काल का ग्रहण ही साबित हुआ जिनके नौजवान सपूत पलक झपकते ही आंखों से ओझल हो गए।

जिले में सड़क दुर्घटनाओं का ये सिलसिला कोई नया नहीं है। पिछले कुछ महीनों के आंकड़े ये बताने के लिए काफी हैं कि सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम कसने व यातायात नियमों की अनुपालना करवाने के लिए पुलिस कितनी संजीदा है। इस साल में ही 31 मार्च तक 38 से ज्यादा बेशकीमती जिंदगिया काल का ग्रास बन चुकी हैं, तो 112 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। हालांकि पिछले साल सड़क दुर्घटनाओं में जान गवाने वालों की संख्या 147 थी और 492 लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए थे।

राजनीतिक दखलअंदाजी एक अहम वजह है

इस साल सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों व घायलों की संख्या 31 मार्च तक ही पिछले साल के तुलना में काफी हैं। सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम कसने के लिए पुलिस विभाग व रोड सेफ्टी क्लबों द्वारा लोगों में जागृति लाने के प्रयास भी कागजी घोड़े दौड़ाने जैसी ही साबित हुए। न तो वाहन चालक यातायात नियमों की अनुपालना कर रहे हैं और न ही पुलिस यातायात नियमों को सख्ती से लागू करवाने के लिए संजीदा।
दुर्घटनाओं में राजनीतिक दखलअंदाजी अहम वजह

जाहिर है कि इसके पीछे भी राजनीतिक दखलअंदाजी एक अहम वजह है। जब भी पुलिस ने यातायात नियमों की अनुपालना न करने वालों पर लगाम कसनी चाही तो किसी न किसी राजनेता की आई सिफारिश ने यातायात नियमों की अनुपालना करवाने वालों के हाथ बांध दिए। हालांकि इसके लिए पुलिस की लापरवाही को भी कम नहीं आंका जा सकता, क्योंकि आला पुलिस अधिकारियों द्वारा बनाई गई योजनाओं का धरातल स्तर पर क्या बन रहा है इसे जानने की कभी कोशिश नहीं की गई।

जाहिर है रोड सेफ्टी क्लब जैसी महत्वाकांक्षी योजना को सदा हल्के में लिया गया। अब भी अगर पुलिस विभाग अपनी गलतियों को सुधारने की बजाय इस पर लीपापोती कर अपनी जान बचाने की कोशिश करता रहा तो जिले की सड़क पर बेखौफ घूम रही मौत पर अंकुश लगा पाना आसान काम नहीं होगा।

क्या कहते हैं डीएसपी

डीएसपी अंब मनोज जंवाल का कहना है कि अधिकांश दुर्घटनाओं में मौत का कारण सिर पर लगी घातक चोट रहा है। जब तक वाहन चालक हेल्मेट पहनना जरूरी नहीं समझेगें तब तक सड़क दुर्घटनाओं में मौत का ग्राफ नीचे नहीं लाया जा सकता। उन्होंने कहा कि रोड सेफ्टी क्लब गठित कर इन पर अंकुश लगाने के प्रयास किए जा रहें हैं।

7 वर्षों में सड़क हादसों के आंकडे

वर्ष                          हादसे                  मौतें                घायल

2012                    239                    57                  436
2013                    239                    63                  462
2014                    259                    82                  391
2015                    255                   101                 401
2016                    292                  153                 453
2017                    292                   147                 492
2018                    62                     38                   112

-देवेंद्र सूद, गगरेट।

यह भी पढ़ें – गुजरात का तुफान पहुंचा सोलन…..

Comments

Coming soon

Career Counsling

Get free career counsling and pursue your dreams