dynasty politics

ये चुनाव बताएगा कि जनता के लिए परिवारवाद मुद्दा है या नहीं

भाजपा ने किया परहेज कांग्रेस ने परिवारों में बांटे टिकट

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला

विधानसभा चुनाव के नतीजे इस बार वंशवाद पर भी फैसला सुनाएंगे। नतीजों से पता चलेगा कि क्या जनता के लिए भी परिवारवाद मुद्दा है या नहीं? भाजपा ने इसी आशंका से परिवारों में टिकट देने से परहेज किया था, जबकि कांग्रेस ने आधा दर्जन से ज्यादा टिकट परिवारों के भीतर दिए हैं। इस चुनाव के बहाने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, कौल सिंह और बीबीएल बुटेल समेत कई नेता राजनीतिक विरासत अपनी अगली पीढ़ी को सौंपने जा रहे हैं। इसलिए चुनाव ये तय करेगा कि जनता वंशवाद की राजनीति को स्वीकार करती है या इसे नकार देगी?

9 नवंबर को संपन्न हुए मतदान में नेताओं के वंश की किस्मत भी EVM में कैद है। हालांकि हिमाचल चुनाव में भाजपा ने किसी भी नेता पुत्र या परिजन को टिकट नहीं दिया है, परंतु कांग्रेस नेताओं ने जमकर अपने वंश को आगे बढ़ाया है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह, कौल सिंह की बेटी चंपा ठाकुर, विधानसभा अध्यक्ष बीबीएल बुटेल के बेटे आशीष बुटेल, कैबिनेट मंत्री रहे स्व. कर्ण सिंह के बेटे आदित्य विक्रम सिंह को टिकट दिया है। जवाली सीट पर विधायक नीरज भारती अपने पिता चौधरी चंद्र कुमार के पक्ष में टिकट की दौड़ से हट गए थे।

मंडी सदर सीट पर कौल सिंह की बेटी चंपा ठाकुर अपने बूते ही डटी रहीं

वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह के सामने भाजपा के डॉ. प्रमोद शर्मा की चुनौती है। मंडी सदर सीट पर कौल सिंह की बेटी चंपा ठाकुर अपने बूते ही डटी रहीं। उनके सामने सुखराम परिवार की साख की चुनौती है। अनिल शर्मा का खुद का रसूख भी काफी है, लेकिन चंपा ठाकुर ने भी प्रचार के मोर्चे पर कोई कसर नहीं छोड़ी है। चंपा ठाकुर जिला परिषद स्तर की राजनीति में अपनी पहचान बना चुकी हैं। बंजार सीट पर आदित्य विक्रम सिंह अपने पिता स्व. कर्ण सिंह की विरासत को संभालने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

उनके पक्ष में कर्ण सिंह के देहावसान से उपजी सहानुभूति लहर के आसार हैं।   उधर, कांग्रेस के कद्दावर नेता और पालमपुर की राजनीति को गहरे तक प्रभावित करने वाले बुटेल परिवार को भी अपनी साख की चिंता है। बीबीएल बुटेल यहां से अपने बेटे आशीष बुटेल को स्थापित करने के लिए प्रयासरत रहे। वे आशीष को टिकट दिलाने में कामयाब  रहे हैं।

पारिवारिक साख से विस पहुंचने की कोशिश

हिमाचल का मतदाता जागरूक हैं। नई पीढ़ी वंशवाद की अवधारणा को आसानी से स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। जितने भी नेता पुत्र चुनाव मैदान में उतरे हैं, वे अपने परिवार की राजनीतिक साख के सहारे विधानसभा में पहुंचने की आस लगाए बैठे हैं। यह सही है कि विक्रमादित्य सिंह युवा कांग्रेस के माध्यम से सक्रिय रहे और चंपा ठाकुर भी जमीन से जुड़ी राजनीति करती आ रही हैं, लेकिन वे विधानसभा पहुंच पाते हैं या नहीं, इसे लेकर सभी में जिज्ञासा है।

ऐसा भी नहीं है कि सिर्फ  यही चेहरे वंशवाद का प्रमाण हैं। कैबिनेट मंत्री प्रकाश चौधरी, जीएस बाली भी अपने बेटों को आगे ला चुके हैं। भाजपा में प्रेम कुमार धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर स्थापित हो चुके हैं। उनके दूसरे बेटे अरुण धूमल भी सक्रिय हैं।

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