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हिमाचल दस्तक टीम। नाहन/सराहां

पच्छाद मैदान में 5 प्रत्याशी

वीरवार को नामांकन वापसी की डेडलाइन खत्म होते ही चुनावी रण की तस्वीर भी साफ हो गई है। हॉट सीट मानी जा रही पच्छाद में भाजपा जहां एक बागी उम्मीदवार आशीष सिक्टा को मनाने में कामयाब रही तो वहीं दयाल प्यारी को चुनावी मैदान में उतरने से नहीं रोक पाई। उधर, धर्मशाला में भी बागी मैदान में डटे हुए हैं। कुल मिलाकर पच्छाद और धर्मशाला में मुकाबला तिकोना बन चुका है…

निर्दलीय उम्मीदवार आशीष सिक्टा द्वारा नामांकन वापस लेने और भाजपा से बागी आजाद प्रत्याशी दयाल प्यारी के मैदान में डटे रहने के बाद पच्छाद विधानसभा उपचुनाव में मुकाबला तिकोना होगा। वैसे तो रणभेरी में पांच प्रत्याशी हैं, लेकिन मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी जीआर मुसाफिर, भाजपा प्रत्याशी रीना कश्यप और भाजपा से बागी निर्दलीय प्रत्याशी दयाल प्यारी के बीच ही माना जा रहा है। नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन वीरवार को केवल भाजपा से बागी निर्दलीय उम्मीदवार आशीष सिक्टा ने ही नामांकन वापस लिया। इसका एलान उन्होंने बुधवार को ही कर दिया था।

अब कांग्रेस से जीआर मुसाफिर, भाजपा से रीना कश्यप और निर्दलीय दयाल प्यारी, सुरेंद्र पाल छिंदा और पवन कुमार चुनावी रण में हैं। आशीष सिक्टा ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतपाल सती, शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. राजीव सहजल व भाजपा के वरिष्ठ नेता चंद्रमोहन ठाकुर की मौजूदगी में नामांकन वापस लिया।

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सिक्टा द्वारा अपना नाम वापस लेने से युवाओं में काफी निराशा हुई है। वर्ष 1982 के विधानसभा चुनाव के उपरांत पहली बार पच्छाद के लोगों ने किसी आजाद प्रत्याशी को समर्थन देने का निर्णय लिया था। 1982 में पच्छाद की जनता ने जीआर मुसाफिर को आजाद उम्मीदवार के रूप में विधानसभा में भेजा था। सहायक निर्वाचन अधिकारी एवं एसडीएम राजगढ़ नरेश वर्मा ने बताया कि वीरवार को नामांकन वापसी के आखिरी दिन निर्दलीय उम्मीदवार आशीष सिक्टा ने नामांकन वापस लिया है।

आशीष सिक्टा के खिलाफ नारेबाजी: नामांकन वापस लेने के दौरान सिक्टा समर्थक उग्र हो गए और उन्होंने आशीष सिक्टा के खिलाफ नारेबाजी भी की। आशीष सिक्टा ने कहा कि वह संगठन में वर्षों से जुड़े हैं। उन्होंने अपने शीर्ष नेतृत्व से मिलने के उपरांत संगठन के हित में अपना नाम वापस लिया है।

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पूजा-अर्चना कर दयाल प्यारी ने शुरु किया प्रचार

पच्छाद विधानसभा उपचुनाव अब रोचक बन चुका है। भाजपा से बागी हुई नेत्री दयाल प्यारी ने नाम वापस न लेकर भाजपा की परेशानी को बढ़ा दिया है। दयाल प्यारी ने वीरवार को भुरेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद प्रचार अभियान शुरु कर दिया।अब पच्छाद में मुकाबला तिकोना हो गया है। कांग्रेस को इसका फायदा मिल सकता है। आशीष सिक्टा के कुछ समर्थक भी उनके नामांकन वापस लिए जाने के बाद दयाल प्यारी के साथ नजर आए। निर्दलीय प्रत्याशी दयाल प्यारी ने दस्तक से बातचीत में बताया कि उन्होंने निर्दलीय चुनाव लडऩे के लिए कमर कस ली है।

किसी पर कोई दबाव नहीं डाला: सत्ती

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सती ने कहा कि भाजपा बहुत बड़ा परिवार है। बड़े परिवार में छोटी-मोटी बातें होती रहती हैं। उन्होंने कहा कि सिक्टा संगठन के कार्यकर्ता हैं और संगठन हित के लिए हमेशा कार्य करते रहेंगे। दयाल प्यारी के बारे में पूछे गए सवाल पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि पार्टी की ओर से किसी पर कोई भी दबाव नहीं डाला गया। सत्ती ने दावा किया कि पच्छाद में भाजपा की जीत निश्चित है। जीत के अंतर को बढ़ाने के लिए वह दयाल प्यारी से मिलने आए थे।

दयाल प्यारी को नहीं मना पाई भाजपा

होटल में इंतजार करते रहे सती और महेंद्र सिंह

सोलन। पच्छाद विधानसभा उपचुनाव में भाजपा अपनी बागी नेता दयाल प्यारी को मनाने में नाकाम रही। वीरवार को होटल शगुन पैलेस में आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती इंतजार करते रहे और दयाल प्यारी को उनके समर्थक गाड़ी में बैठाकर प्रचार के लिए ले गए। दयाल प्यारी के मैदान में डटे रहने के बाद अब भाजपा की मुश्किलें जरूर बढ़ी हैं। वीरवार को विधानसभा उपचुनाव में नामांकन वापस लेने की अंतिम दिन था। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती व आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर दयाल प्यारी से मिलने के लिए होटल शगुन पैलेस पहुंचे थे। वीरवार सुबह दयाल प्यारी को भी इसी होटल में बुलाया गया था।

भाजपा की सिपाही हूं और रहूंगी: दयाल प्यारी

दयाल प्यारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वह भाजपा की सिपाही हैं तथा हमेशा रहेंगी । कई वर्षों से वह भाजपा के लिए काम करती रही हैं तथा जनता से हमेशा जुड़ी रहती हैं। भाजपा के कुछ तानाशाह नेताओं की वजह से उन्हें टिकट नहीं मिल पाया। समर्थकों की मांग पर ही वह चुनावी मैदान में उतरी हैं।

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आसान नहीं भाजपा और कांग्रेस की राह

धर्मशाला 7 आजमाएंगे किस्मत

धर्मशाला। उपचुनाव में कुल सात प्रत्याशी मैदान में रह गए हैं। वीरवार को किसी भी आजाद प्रत्याशी ने नामांकन वापस नहीं लिया। बागियों का दंश भाजपा-कांग्रेस दोनों के हिस्से में आया है। कांग्रेस-भाजपा को अब अपने-अपने अधिकृत उम्मीदवारों की जीत के लिए क्रमश: पुनीश पाधा और राकेश चौधरी से जूझना होगा। कांग्रेस के विजय इंद्र कर्ण मैदान में हैं तो भाजपा ने विशाल नैहरिया पर भरोसा जताया है। अब की बार बीस हजार पार के नारे के साथ मैदान में उतरी भाजपा के लिए टॉरगेट हिट करना चुनौती बन गया है तो कांग्रेस भी इतिहास पलटने के लिए मैदान में है।

इन चार के अलावा तीन आजाद प्रत्याशी निशा कटोच, मनोहर लाल, सुभाष शुक्ला भी मैदान में हैं। खास बात यह है कि मौजूदा हालात में फिलवक्त किसी की भी राह आसान या दो पक्षों में मुकाबला नहीं आंका जा सकता। हल्की सी वोट फलक्चुएशन किसी की भी किस्मत को सुला या जगा सकती है। दोनों प्रमुख दलों को यह उम्मीद है कि मतदान के दिन तक हालात और हालत दोनों ही करवट लेंगे और मुकाबला बीजेपी बनाम कांग्रेस ही होगा।

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