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भोरंज बीजेपी के नए गुरु स्व. धीमान की धरती पर नहीं आ रहे रास

धूमल की मौजूदगी में एक जनसभा में दिखे नेता चुनाव प्रचार से गायब

हिमाचल दस्तक। भोरंज

पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. धूमल के दखल के बावजूद भोरंज बीजेपी कार्यकर्ता व नेताअेां की नाराजगियां पार्टी उम्मीदवार खत्म नहीं कर सकी हैं। हालांकि धूमल के मुख्यमंत्री बनने की घोषणा के बाद बेहद खराब हालत में चल रही भोरंज बीजेपी को काफी ऑक्सीजन मिली है। व्यक्तिगत तौर पर भोरंज बीजेपी उम्मीदवार इसका पूरा लाभ नहीं ले पाया है।

4 नवंबर शनिवार देर रात को धूमल की मौजूदगी में चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में पार्टी उम्मीदवार कमलेश कुमारी ने विधायक अनिल धीमान व भोरंज संघर्ष समिति के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने मंच साझा करके सुलह-सफाई का एक संदेश दिया था। धूमल के जाते ही विरोध में उबल रही भोरंज बीजेपी जैसे थे कि स्थिति में पहुंच गई। उसके बाद पार्टी उम्मीदवार का चुनाव प्रचार एक बार फिर रिश्तेदारों के ही सहारे है।

बस्सी का होटल सन स्काई जहां भोरंज उपचुनाव में कार्यकर्ताओं का हजूम व गहमागहमी देर रात तक रहती थी। बीजेपी के इस चुनावी अड्डे में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है, जो पार्टी प्रत्याशी की हालत बयान कर रहा है। भोरंज में बीजेपी की जमात के बने नए गुरु वर्षों पुराने कार्यकर्ताओं को अपनी लाठी से हांकना चाह रहे हैं, जोकि कार्यकर्ताओं को नागवार गुजरा है।

पार्टी उम्मीदवार की इस कमजोरी का लाभ वर्षों से कमजोर पड़ी कांग्रेस को मिला है

भोरंज संघर्ष समिति ने धूमल का आदेश मानकर बेशक अपने दम पर रोड शो निकाल कर चुनावी फिजा का रुख बीजेपी की तरफ मोडऩे का प्रयास किया है, लेकिन  भोरंज संघर्ष समिति को भी अभी तक उम्मीदवार अपने साथ नहीं चला पाई है। इस कारण से भोरंज संघर्ष समिति भी अभी तक बाहरी समर्थन ही देने को विवश है। पार्टी आलकमान की ओर से मिले खर्चे के चर्चाओं के बावजूद चुनावी प्रबंधन को पूरी तरह अपने हाथ में रखे भोरंज बीजेपी के नए गुरु कार्यकर्ताओं को अपनी बनाई हदों व हिदायतों में रखना चाह रहे हैं।

उधर, पार्टी उम्मीदवार की इस कमजोरी का लाभ वर्षों से कमजोर पड़ी कांग्रेस को मिला है। अंतरकलह के बावजूद चुनाव में आगे बढ़ी कांग्रेस ने जाहू से चंदरूही, चंबोह, करसोह, धमरोल तक लोकल ब्वॉय का नारा देकर चुनावी फिजा को कांग्रेसी उम्मीदवार सुरेश कुमार के पक्ष में करने का प्रयास किया है।  उधर, समीरपुर वाली बैल्ट में बीजेपी प्रत्याशी को धूमल के नाम पर लाभ मिल सकता है।

मुंडखर, लुदर, मनोह व पट्टा आदि क्षेत्रों में कांटे की टक्कर मानी जा रही है। लगातार 30 वर्षो से स्व. आईडी धीमान की धरती भोरंज में बीजेपी के नए गुरु का पाठ न जनता को रास आ रहा है और न कार्यकर्ताओं को रास आ रहा है। यह वही धरती है, जहां 30 साल से बीजेपी का परचम लहराता नजर आ रहा है। आलम यह है कि बीजेपी के नए गुरु न गैरों में खौफ पैदा कर पाए हैं न अपनों को साथ चला पाए हैं।

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