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Discussion on Kangra BJP's quarrel in Shanta-Jayaram Thakur

डिनर के बहाने ओकओवर में हुई सभी विवादों पर बात , इंदु और धवाला के बाद अब पालमपुर में उठ रहा बवंडर

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : राज्य सरकार की पहले दो साल की अवधि में ही कांगड़ा भाजपा से उठ रहे झगड़ों पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के बीच लंबी चर्चा हुई है। शांता शिमला आए और ओकओवर में डिनर पर सीएम से मिले। सूत्र कहते हैं कि इस मुलाकात में सभी मसलों पर बात हुई।

कांगड़ा में पहले इंदु गोस्वामी और रमेश धवाला ने अनदेखी और विधानसभा में दूसरे नेताओं की दखलअंदाजी को आरोप लगाया। फिर इंदु ने तो महिला मोर्चा अध्यक्ष पद छोड़ते हुए अनी बात दिल्ली तक पहुंचाई। मुख्यमंत्री ने इस ज्वालामुखी के मामले को तो शांत कर दिया, लेकिन पालमपुर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ता अपने काम न होने के कारण काफी आहत हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार यहां से भाजपाई अब शीघ्र ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सती ने मिलने का मन बना रहे हैं।

पालमपुर के कुछ भाजपा कार्यकर्ता शुक्रवार को शिमला में मुख्यमंत्री कार्यालय में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिलने तो पहुंचे, परंतु उन्हें अपनी पूरी बात रखने का समया नहीं मिल पाया। यहां से पार्टी प्रत्याशी रही इंदु गोस्वामी अब पालमपुर छोड़ गई हैं। शांता कुमार भी अब सक्रिय राजनीति से दूर हैं। भाजपा कार्यकर्ता अब यह भी शिकायत करने लगे हैं कि सदस्यता अभियान में पार्टी ने जिन नेताओं ने काम नही किया उन पर भी कार्रवाई हो।

भाजपाईयों ने आरोप लगाया कि जिला कांगड़ा में ऐसे कई नेता हैं जो पार्टी को मजबूत करने के बजाय कमजोर करने में लगे हैं। पूर्व मुख्यंत्री शांता कुमार शुक्रवार को एक निजी दौरे पर शिमला पहुंचे थे। वैसे तो 12 अगस्त को सोलन में कार्यक्रम है, लेकिन शुक्रवार को मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ओक ओवर में शांता कुमार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने डिनर पर बुलाया था। बताया जाता है कि इस दौरान शांता और जयराम ठाकुर के बीच प्रदेश के कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। शांता कुमार ने शनिवार को राज्यपाल कलराज मिश्र से भी भेंट की।

भाजपा में हमेशा कांगड़ा से उठे बगावती स्वर

भाजपा सता में जब भी आई, कांगड़ा जिला से ही बगावती स्वर उठते रहे हैं। जब 1998 से 2003 में भाजपा की सरकार बनी तब कांगड़ा के सात विधायकों ने सरकार के विरोध में कई आरोप लगाए थे। अब एक बार फिर कांगड़ा से ही उठ रहे बगावती स्वर विपक्ष को बैठे-बैठे मुद्दा देने में लगे हैं। हालांकि इस बार केंद्र और प्रदेश में पहले अलग परिस्थितियां हैं।

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