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1500 नए बस रूट जारी करने पर संघर्ष समिति ने उठाए सवाल

नीति बनाने की भी प्रदेश सरकार से मांग उठाई

हिमाचल दस्तक। मटौर
बजट में 1500 बस रूट परमिट जारी करने पर निजी बस आपरेटर्ज संघर्ष समिति ने सवाल खड़े किए है। संघर्ष समिति का कहना है कि जयराम सरकार निजी बस आपरेटरों को नजरअंदाज न करे। कांगड़ा में संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रवीण दत्त शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के दौरान सदस्यों ने पुरजोर मांग उठाई कि पहाड़ी राज्य में इतने ज्यादा बस रूट परमिट जारी करने से पहले सकार को निजी बस आपरेटरों को साथ में लेकर एक नीति बनानी चाहिए और उनके हितों का पूरा ख्याल रखा जाए।

संघर्ष समिति का कहना है कि पूर्व सरकार ने पहले ही जरूरत से ज्यादा बसें खरीद कर निजी बस आपरेटरों के साथ प्रतिस्पर्धा खड़ी कर रखी है। सदस्यों का कहना है कि समय अंतराल कम होने की वजह से निजी बस आपरेटर्ज टैक्स व अन्य आदयगियां करने में असमर्थ तथा बैंक डिफाल्टर हो चुके हैं। संघर्ष समिति का कहना है कि सरकार ऐसी नीति बनाए जिससे उनके हित भी सुरक्षित रहें। केवल उन्हीं क्षेत्रों में रूट परमिट जारी किए जाएं जहां बसों की जरूरत है।

सदस्यों का कहना है कि रूट परमिट चिन्हित करने से लेकर जारी करने तक कानूनी प्रक्रिया को अपनाया जाए। उच्च न्यायालय के केस 7295/2012 के दिए गए निर्णय के अनुसार दिशा-निर्देशों को पालन किया जाए। रूट परमिट चिन्हित करने के दौरान उस क्षेत्र के निजी बस आपरेटरों को भी रूट आईडेटिफिकेशन कमेटी को बिठाया जाए और चिन्हित रूटों को समय सारिणी के साथ समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाए।

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