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केंद्र के सभी राज्यों को निगरानी रखने के निर्देश

जन औषधि केंद्रों पर मिल रही 50 प्रतिशत कम दाम पर दवाई

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में ब्रांडेड दवा लिखने वाले डॉक्टरों पर गाज गिर सकती है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री जन औषधि योजना शुरू की है, जिसके तहत मरीजों को जरूरी दवाएं 50 प्रतिशत कम दाम पर दी जा रही है। लेकिन, कुछ डॉक्टर्स मरीजों को ब्रांडेड दवाएं भी लिख रहे हैं जो जन औषधि केंद्रों पर नहीं मिलती। इसे देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों के स्वास्थ्य विभाग को निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। गत दिन अपने शिमला प्रवास के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने ये बातें कहीं।

उनका कहना था कि ब्रांडेड दवा लिखी गई पर्ची के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग को मरीज शिकायत कर सकते हैं। उसके बाद संबंधित अस्पताल प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 330 जैनरिक दवाएं मिल रही हैं। आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज में जैनरिक दवाओं को लेकर कई बार शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन सूचना स्वास्थ्य विभाग तक नहीं पहुंची।

ऐसे में अब स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों के बाद मरीज सतर्क होंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने यहां तक कह दिया था कि जेनेरिक दवा न मिलने की स्थिति या डॉक्टरों द्वारा ब्रांडेड दवा लिखने की स्थिति में उन्हें शिकायत कर सकते हैं।

निजी केमिस्ट का रास्ता दिखाने वाले डॉक्टरों पर भी नजर

सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे ऐसे डॉक्टरों पर भी नजरें दौड़ रही हैं, जो मरीजों को निजी केमिस्ट का रास्ता दिखाते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अधिकांश डॉक्टर निजी केमिस्ट के साथ सांठगांठ कर रहे हैं, जिसके बाद डॉक्टरों को वहां से कमीशन भी मिल रही है।

मरीजों को सस्ते दाम पर दवा मिल सके इसके लिए मोदी सरकार ने जन औषधि केंद्र खोल दिए हैं, जहां पर मरीजों को 50 फीसदी कम दरों पर दवाई मिलती हैं। ब्रांडेड दवा लिखने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को भी निर्देश दिए हैं। -जेपी नड्डा, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

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