hard work man

गजेंद्र सिंह रोज बैसाखी के सहारे घसीटता है अपनी रेहड़ी

दिनभर होने वाली कमाई से चलता है घर

सोमी प्रकाश भुव्वेटा। चंबा
चंबा शहर के जुलाहकड़ी मोहल्ले के गजेंद्र सिंह पोलियोग्रस्त होने के कारण आम इनसान की तरह चलने-फिरने में असमर्थ हैं। फिर भी मायूस होने की बजाय परिवार की खातिर रोजाना चंबा शहर में चलती-फिरती रेहड़ी लगाते हैं। गजेंद्र की हिम्मत की दाद देनी होगी कि यह चलने-फिरने मेें असमर्थ होने पर भी बैसाखी के सहारे रेहड़ी को घसीट कर यहां से वहां ले जाकर थोड़ी बहुत कमाई करके अपना परिवार चला रहा है। चंबा शहर के पुराने बस स्टैंड के समीप (धड़ोग मोहल्ले के पास काली माता मंदिर को जाने वाले रास्ते के) एक किनारे पर गजेंद्र को सीजन के हिसाब से कुछ न कुछ अपनी आजीविका चलाने के लिए बेचते देखा जा सकता है।

गजेंद्र पहले मुख्य शहर में रेहड़ी लगाते थे। इसलिए अब गजेंद्र ने धड़ोग के समीप काली माता मंदिर को जाने वाले रास्ते के एक छोर को ठिकाना बनाया है। यहां से पैदल जाने वाले लोग उनसे कुछ न कुछ ले जाते हैं। ऐसा करके दिन भर की होने वाली कमाई से ही उसका घर चलता है। समाज के उन लोगों के लिए गजेंद्र एक बड़ी मिसाल हैं, जो लोग थोड़ी सी परेशानी होने पर हार मान जाते हैं।

जरा सोचिये चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद गजेंद्र को बैसाखी के सहारे रेहड़ी घसीटतेे वक्त कितनी तकलीफ होती होगी। गजेंद्र रोज पाई-पाई इकट्ठा कर परिवार चलाता है। इसलिए नगर परिषद, पुलिस और स्थानीय प्रशासन को इस तरह के इनसान को यहां वहां भटकाने की बजाय एक जगह बैठकर आजीविका चलाने देनी चाहिए। असमर्थता के बावजूद दूसरों के आगे मदद मांगने की बजाय ईमानदारी से मेहनत की कमाई से घर चलाने वाले गजेंद्र सिंह के हौंसलों को सलाम है।

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