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मजारा पंचायत में गोलमाल का मामला…

हरकत में आया प्रशासन एडीसी आज लेंगे रिपोर्ट

प्रेम कौशल। अजौली
मजारा पंचायत में लाखों रुपये के गोलमोल के मामले में नया मोड़ आ गया है। 33 दिन से चल रही जांच चाहे अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है, लेकिन इसी दौरान पंचायत के खाते में सवा लाख रुपये जमा हो गया है। गोलमाल मामले में चल रही जांच के बीच सवा लाख रुपये जमा करवाने से साफ प्रतीत हो रहा है कि मजारा पंचायत में बड़े स्तर पर पैसों का हेरफेर हुआ है। हिमाचल दस्तक ने इस मामले को उजागार किया, जिसके बाद पंचायत, बीडीओ व जिला प्रशासन हरकत में आए। इस मामले रिकॉर्ड तलब किया गया।

पूर्व सचिव को कार्यमुक्त भी किया गया। इसी दौरान मामले को दबाने के भी दबाव बने। मामले के गंभीर होने के चलते व मीडिया में आने के बाद गांव में भी इसका खूब हल्ला हुआ है। ग्रामीण भी इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठाने लगे है और वर्तमान में चल रही धीमी जांच पर भी ऊंगुलियां भी उठाई जा रही है।

उधर, मजारा पंचायत के खाते में सवा लाख रुपये जमा होने के बाद जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया है। जांच का जिम्मा देख रहे एडीसी ने भी कहा है कि मंगलवार को मामले की पूरी रिपोर्ट ली जाएगी। पैसे किसने जमा और क्यों करवाए हैं, इसको लेकर पता लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि साफ कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

दिख रही है विभाग की लापरवाही

मजारा पंचायत के पूरे गोलमोल में पंचायत राज विभाग की लापरवाही भी नजर आ रही है। हिमाचल दस्तक द्वारा प्रमुखता से मामले को उजागर करने के बाद चाहे जांच शुरू हुई, लेकिन जिस गंभीरता से जांच आगे बढऩी चाहिए थी, वैसा नहीं हो पाया है। बल्कि अधिकारी ही गोलमोल के पैसे को जमा करवाने का समय प्रदान कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि विभाग की एक पंचायत में बिना काम लाखों रुपये निकाले गए, लेकिन बावजूद इसके विभाग किस कारण से जांच तेज करने से हिचक रहा है।

ये है मामला

सदर विधानसभा क्षेत्र की मजारा पंचायत में लाखों रुपए के कामों की न तो पंचायत बुक में एंट्री मिल रही है, न बिल है और न रसीद। और तो और काम के लिए पैसा खर्च पैसे की डिटेल भी नहीं मिल रही है, लेकिन बैंक से पैसा जरूर निकला है। ऐसे में करीब डेढ़ साल से बैंक के खाते से निकले पैसे और पंचायत की बुक के एंट्री का मिलान नहीं हो पा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंचायत ने इस मामले की जानकारी बीडीओ ऊना को भी दी है कि पंचायत के अकाऊंट से लाखों रुपए की निकासी तो हुई, लेकिन उसकी अकाउंट में कहीं एंट्री नहीं है। वहीं पूर्व सचिव इस मामले में शक की सुई में रहे।

माना जा रहा है कि यह पैसा बैंक से निकाला गया है, लेकिन काम कोई भी करवाया नहीं गया है। आखिर यह पैसा किसकी जेब में गया और चर्चा यह भी है कि प्रधान के भी जाली हस्ताक्षर कर अकाऊंट से पैसे निकले हैं, लेकिन इस पर प्रधान का गोलमोल जवाब मिला। इस पूरे मामले को लेकर एडीसी ऊना अरिंदम चौधरी ने जहां एक ओर जांच बैठाई, वहीं दूसरी पूर्व सचिव को कार्यमुक्त कर दिया। अब 5, 6 व 7 फरवरी को 49 हजार, 49 हजार व 27 हजार रुपये पंचायत खाते में जमा करवा दिए गए हैं।

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