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Enrollment of students in government schools, parents disillusioned with private schools

 अध्यापकों की घर-घर जाकर लोगों से सरकारी स्कूलों में बच्चे दाखिल करवाने की पहल लाई रंग

अभिनव कौशल। हमीरपुर : हमीरपुर जिले के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों का दाखिला बढऩा शुरू हो गया है। अभिभावक अब निजी स्कूलों से बच्चों को निकालकर सरकारी स्कूलों में दाखिल करवा रहे हैं। वे अपने नौनिहालों को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टौणीदेवी एवं बड़सर क्षेत्र के आदर्श स्कूल बिझड़ी, सीसे स्कूल महारल, धबीरी, आदर्श प्राथमिक स्कूल महारल, उच्च माध्यमिक सठवीं माध्यमिक स्कूल जमली में पढ़ा रहे हैं। यहां के आठ छात्र ऐसे हैं, जिन्हें सरकार द्वारा अव्वल आने पर कंप्यूटर दिए गए है।

बता दें कि शैक्षणिक सत्र 2018-19 में 100 से अधिक बच्चों ने निजी स्कूल छोड़कर उपरोक्त सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है। इनमें छठी से दसवीं कक्षा तक के बच्चे शामिल हैं। टौणी देवी स्कूल प्रिंसिपल के मुताबिक जमा एक में प्रवेश के लिए भी सौ से ज्यादा प्रोसपेक्ट्स बिक चुके हैं।

खेल-खेल में पढऩा सीख रहे नौनिहाल

इन स्कूलों की दीवारों पर कई तरह के चार्ट लगाए गए हंै, जो पढऩे के लिए आकर्षित करते दिखते हैं। स्कूल के क्लास रूम हाईटेक तरीके तैयार किए गए हैं। ऐसे में बच्चों को क्लास रूम में खेल-खेल में पढऩे का मौका मिलता है। स्कूल में इको क्लब, एनएसएस तथा स्क़ाऊट एंड गाईड की यूनिट बच्चों में मानवीय गुणों तथा अनुशासन का पाठ पढ़ा रहे हैं।

सरकारी स्कूलों में अत्याधुनिक सुविधाएं मिल रहीं छात्रों को

सरकारी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे, स्वच्छता अभियान, सेव वाटर, मिड-डे मील, नैपकिन वेंडिंग मशीन, बास्केटबाल तथा वॉलीबाल कोर्ट जैसी सुविधाओं ने निजी स्कूलों के बच्चों को अपनी ओर खींचा है।

क्या कहना है शिक्षकों का

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टौणी देवी की प्रिंसिपल वंदना धीमान ने बताया कि स्कूल के शिक्षकों की मेहनत रंग ला रही है। निजी स्कूलों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढऩे के लिए लौट रहे हैं। 2018 में छठी से जमा दो के बच्चों की संख्या 388 थी, जो कि 2019 में तक 375 तक पहुंच गई है। अभी सौ से अधिक प्रोसपेक्ट्स जमा एक में प्रवेश के लिए बिक चुके हैं। वहीं, बड़सर स्कूल के प्रधानाचार्य करतार सिंह ने बताया कि अभिभावक निजी स्कूलों से बच्चों को निकालकर सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अध्यापकों की बच्चों के अभिभावकों को घर-घर जाकर अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों मे दाखिल करवाने की योजना सफ ल साबित हुई है।

क्या कहना है शिक्षकों का

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टौणी देवी की प्रिंसिपल वंदना धीमान ने बताया कि स्कूल के शिक्षकों की मेहनत रंग ला रही है। निजी स्कूलों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढऩे के लिए लौट रहे हैं। 2018 में छठी से जमा दो के बच्चों की संख्या 388 थी, जो कि 2019 में तक 375 तक पहुंच गई है। अभी सौ से अधिक प्रोसपेक्ट्स जमा एक में प्रवेश के लिए बिक चुके हैं। वहीं, बड़सर स्कूल के प्रधानाचार्य करतार सिंह ने बताया कि अभिभावक निजी स्कूलों से बच्चों को निकालकर सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अध्यापकों की बच्चों के अभिभावकों को घर-घर जाकर अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों मे दाखिल करवाने की योजना सफ ल साबित हुई है।

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