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सैकड़ों हारियान व कारकून बने इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह

बाहू मंदिर में कन्याओं का किया पूजन

हिमाचल दस्तक। बंजार
बंजार उपमंडल की जिभी घाटी की दो खाड़ागाढ़ व तिलोकपुर कोठियों के अधिष्ठाता देवता गढ़पति मूल शेषनाग ने नए देवरथ की प्राण प्रतिष्ठा के बाद दर्जनों वाद्य यंत्रों की कलरव ध्वनि व सैकड़ों हारियानों व कारकूनों के लाव लश्कर के साथ ऐतिहासिक शक्तिपीठ श्रीजोगणी माता मंदिर बाहू पहुंचे। वीरवार को बाहू के अधिष्ठाता देवता लक्ष्मीनारायण की मौजूदगी में अर्जित शक्तियों की स्थापना की। इसके गवाह हजारों हारियान व कारकून बने।

इस अवसर पर बाहू मंदिर में श्री जोगणी माता के रूप में दर्जनों कन्याओं को पूजा गया व उनसे जनकल्याण की कामनाएं की गईं। इसके बाद बाहू में जनकल्याण के लिए गढ़पति मूल शेषनाग के हारियानों व कारकूनों ने एक शाही धाम का आयोजन किया। इसका लुत्फ खाड़ागाढ़, तांदी व बाहू पंचायतों सहित अन्य क्षेत्रों से आए हजारों लोगों ने उठाया।

वीरवार को श्रीजोगणी माता मंदिर बाहू में अर्जित शक्तियों की स्थापना की गई

गौरतलब है कि शेषनाग के नए देवरथ में इस बार ऐतिहासिक कुल्लू के राजा द्वारा शताब्दियों पूर्व भेंट किया गया चांदी का मोहरा लगाया गया है। इसे कुछ दशकों पूर्व रथ से उतारा गया था तथा इसके स्थान पर अस्सी के दशक में सोने का मोहरा लगाया गया था। गौरतलब है कि इससे पहले 21 दिसंबर 1973 को गढ़पति मूल शेषनाग जिभी का देवरथ बना था व इसकी प्राण प्रतिष्ठा हुई थी।

अब 44 वर्ष बाद उनके नए देवरथ का निर्माण कार्य 6 दिसंबर से आरंभ किया गया था व 8 दिनों में कुशल कारीगरों के द्वारा अंगाह की लकड़ी व तांबे की धातु से इसका निर्माण कार्य पूर्ण करके 14 दिसंबर को नए देवरथ का प्राण प्रतिष्ठा समारोह उनकी तपोस्थली जिभी मंदिर में आयोजित किया गया। इस प्रतिष्ठा समारोह के तीसरे दिन 17 दिसंबर को परंपरानुसार गढ़पति मूल शेषनाग अपने नए देवरथ पर विराजमान होकर अपने बाहू दौरे पर रवाना हुए थे जहां उन्होंने पांच दिनों की यात्रा के बाद वीरवार को श्रीजोगणी माता मंदिर बाहू में अर्जित शक्तियों की स्थापना की गई।

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