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Farmers can not get the right price for silk pests

पिछले साल 950 रुपये थी प्रति किलो कीमत, इस वर्ष मिल रही 750 रुपये

हिमाचल दस्तक। बड़सर : विकास खंड बिझड़ी में रेशम के कीड़े पालने वाले किसानों को उचित रेट नहीं मिल पा रहे हैं, जिस कारण किसानों को मायूसी हाथ लग रही है। किसानों को पहले रेशम के कीड़े पर एक किलोग्राम पर 950 रुपये मिलते थे, लेकिन अब किसानों को 750 रुपये मिल रहे हैं।

गौर रहे कि विकास खंड बिझड़ी के तहत आने वाले क्षेत्रों में झंझयानी, बडडू, करयाणी, नारा, खरोटा, वदलोई व घोड़ी धबीरी सहित अन्य गावों के किसानों ने मार्च माह में बल्ह विहाल स्थित रेशम विक्रय केंद्र से रेशम के के बीज लिए थे। किसानों ने कड़ी मेहनत करके रेशम तैयार किए, जब किसानों ने रेशम के कीड़े बेचे, तो उनको पिछली बार के मुकाबले प्रति किलो 200 रुपये कम मिल रहे हैं। इसके कारण कोकुन किसानों के ही घरों में पड़ा हुआ है। पिछले वर्ष 950 रुपये प्रति किलो रेट किसानों को मिला था, लेकिन किसानों को इस वार 750 रुपये प्रति किलो ही मिल रहे हैं। बिझड़ी खंड के क्षेत्रों में लगभग 265 छोटे किसानों ने आजीविका कमाने के उद्देश्य से रेशम के कीड़े पाल रखे हैं।

क्षेत्र के किसान ज्ञान चंद, देवराज, सुभाष चंद, मीना देवी, बीना देवी, शीला देवी, रोमा देवी सहित अन्यों ने कहा कि इस बार रेशम के कीड़े के उन्हें उचित रेट नहीं मिल पा रहे हैं। किसानों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि उन्हें पिछले वर्ष के भाव का ही उचित रेट रेशम के कीड़ो का दिलाया जाए। उधर, बीडीओ बिझड़ी चंद्रवीर सिंह ने बताया कि मार्केट के हिसाब से रेशम के कीड़ों के दाम मिलता है। अभी रेशम के कीड़ों के दाम तय नहीं हुआ है, जल्द कीमत तय की जाएगी।

 

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