Following an farmers and ranchers to low milk prices, the government has a setback

लोगो ने दूध के दाम घटाने के बजाय बढाने की उठाई मांग 

ललित ठाकर । पधर : एक तरफ केंद्र की मोदी सरकार 2022 तक किसानों की आय दुगनी करने की बड़ी बड़ी बातें करती है वही दूसरी तरफ  किसानों के भैंस के दूध के दाम सरकार ने लगभग 4. 81 रुपये कम करने से किसानों को बहुत बड़ा झटका दे दिया है ।

हर बार सरकार प्रदेश के किसानों पर राजनीति  रोटियां सेकती आई है । चाहे कोई भी सरकार क्यों न हो । एक तरफ प्रदेश की सरकार किसानों को लाभ पहुंचाने की बात करती है लेकिन धरातल में कुछ और ही होता है । दूध के दाम लगभग पांच रुपये कम करने से पशुपालको और किसानों को किसी झटके से कम नही है । पधर उपमंडल के किसानों ने दूध के दाम में किए गए बदलाव की अधिसूचना को निरस्त कर दूध का मूल्य कम करने के बजाए बढ़ाने की मांग प्रदेश सरकार से उठाई है।
किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि शीघ्र यह बदलाव नही किया गया तो हजारों किसान आंदोलन पर उतारू हो कर सड़कों पर उतरेंगे। लोगो का कहना है की पशुओं से मिलने वाले दूध बेचकर अपने घर का खर्चा चलाया जाता था लेकिन सरकार ने दूध के पांच रुपये कम कर दिए है जिस कारण हर रोज दस से पंद्रह लीटर दूध बेचने वालों को पचास से सौ रुपये की चपत हर रोज लग रही है । वही लोगो ने बताया कि मिल्क फेडरेशन अपने आप लगभग 37 रुपये दूध बेचता है और हमारे से आधे रेट पर दूध लिया जाता है जो किसानों के साथ सरासर धोखा है ।
किसानों का कहना है कि हर बार सरकार आती है और जाति है लेकिन किसानों के ऊपर ही राजनीतियाँ कि जाति है । किसानों का कहना है कि गांव के लोगो की आजीविका दूध बेचकर चलती है लेकिन दूध के दाम बढ़ाने के बजाय कम किये जा रहे है । किसानों का कहना है कि मिल्क फेडरेशन जब दूध लेता है तो उसका दाम 20 रुपये होते है और फेडरेशन के बर्तन में दूध डालने के बाद उसके दाम डबल हो जाते है । जो लोगो के साथ सरासर अन्याय है ।
 किसानों में नरायण सिंह, दीना नाथ,  हरीश यादव, संजय यादव, जय सिंह, नाग राम, नारद राम चावला, दसौंधी राम, भादर सिंह, शेर सिंह, रसालु राम, रांझु राम, काली दास, नारायण सिंह और सेवक राम यादव आदि का कहना है कि एकतरफ बेहताशा महंगाई से किसान परेशान हैं। वहीं दूसरी ओर सरकार इस महंगाई के दौर में दूध के दाम बढ़ाने के बजाए कम कर रही है जिसका किसान विरोध करते है अगर सरकार ने इस अधिसूचना को निरस्त नही किया गया तो  किसान सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन करेंगे। जरूरत पड़ने पर किसान अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी उतरने की योजना बना रहे हैं।
आपको बता दें कि अगर किसान महिलाओं में सुनीता चौहान, गंगा देवी, कमला देवी, आसू, सावित्री कुमारी, शीला देवी, विमला, मीतू और गायत्री देवी ने कहा कि किसानों की अनदेखी सभी सरकारें करती आई हैं। कर्मचारियों के हितों के लिए जहां नित नई नई घोषणाएं और लोक लुहावने वायदे किए जाते हैं। वहीं विधायकों  और सांसदों के वेतन और भत्ते भी एकमत से बढ़ाए जाते हैं। लेकिन किसानों के लिए मेहरबानी करने के बजाए उल्टे उनका हक छीनने की कोशिश प्रदेश सरकार कर रही है।
लोगो का कहना है कि प्रदेश के किसान आज भी अपने कंधों पर दूध उठाकर कई किलोमीटर दूर दूध बेचने जाते है और किसानों की आजीविका का मुख्य धंधा दूध बिक्रय है । वही किसानों की आजीविका खेतीबाड़ी के साथ साथ पशु धन भी है । लोगो का कहना है कि दूध कोई नल से नही निकलता लोगो को रात दिन मेहनत करनी पड़ती है ।  जो दूध के दाम पानी के दाम से कम किए जा रहे हैं। पानी की बोतल आज बाजार में तीस रुपए में बिक रही है फिर दूध का दाम उससे भी कम क्यों है ।  उन्होंने कहा कि सरकार इस निर्णय को वापिस नही लेती है तो किसान आंदोलन शुरू किया जाएगा।
“प्रदेश सरकार को दूध के दाम घटाने के बजाय बढाने चाहिए । क्योंकि गांव के लोगो की मुख्य आजीविका दूध ही है । हम ऐसी किसान विरोधी सरकार की कड़े शब्दों में निदा करते है ।” — रेशमा ठाकुर , कांग्रेस द्रंग ब्लाक अध्यक्ष
मिल्क फेडरेशन के चैयरमेन निहाल चन्द शर्मा से बात करनी चाही तो पहले उन्होंने किसी कार्यक्रम में होने की बात कही लेकिन बाद में उन्होंने फोन ही नही उठाया ।

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