News Flash
Gayatri Maa

धौम्य ऋषि ने यहां लोहे की सलाखों को जला किया था हवन

घनश्याम शर्मा, मनाली।। प्रसिद्व धार्मिक स्थल Gayatri मंदिर जगतसुख का निर्माण महाभारत काल में लगभग 5500 वर्ष पूर्व पांडवो के द्वारा किया गया था। पांडवो के कुलपुरोहित धौम्य ऋषि ने इस स्थान पर घोर तपस्या करके और लोहों की सलाखों को जला कर हवन किया था और जिसके परिणाम स्वरूप Gayatri Maa ने अपने तीनों रूपों मे धौम्य ऋषि को दर्शन दिये थे।

  • Maa के मंदिर का निर्माण महाभारत काल में पांडवो ने किया
  • पांडवो ने रात में मन्दिर का निर्माण किया

उसके पश्चात माता ने धौम्य ऋषि से वर मांगने को कहा ऋषि ने उन्हें इसी स्थान पर विराजमान होने को कहा और उसी समय से माता यहां पर अपने तीनों रूपों में विराजमान है और अपने भगतों पर पूरी कृपा दृष्टि रखे हुए है। Maa के मंदिर का निर्माण महाभारत काल में पांडवो ने किया है जब पांडवो को अज्ञात वनवास हुआ था।

उस समय पांडव यहां हिमालय में आए थे और उनके गुरू का भी उन्हें आदेश था कि जब आप हिमालय में जाओगे तो हिमालय में एक ऐसा स्थान आयेगा जहां पर आप को गायत्री मां के मन्दिर का निर्माण करना है। अपने गुरु कि आज्ञा का अनुसरण करते हुए पांडवो ने रात के समय में मन्दिर का कार्य किया पर पांडव मंदिर का निर्माण नहीं कर सके क्योंकि बह रात को काम करते थे रात ढलते ही पांडव दूसरे स्थान को चले जाते थे। जिसके चलते Maa के मन्दिर का निर्माण आधा रह गया था और बाकी के बचे हुए काम को जगतसुख गांव के ग्रामीणों ने पूरा किया है।

Comments

Coming soon

This is Rising!

Career Counsling

Get free career counsling and pursue your dreams