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Give a 'Sahara' by the Chief Minister!
  • गंभीर रोगियों के लिए घोषित योजना पर वित्त विभाग को आपत्ति
  • इन्हें हर माह 2000 देना चाहते हैं सीएम 48 करोड़ खर्च अखरा

राजेश मंढोत्रा। शिमला : अपने और मंत्री-विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ाते समय चुप रहने वाली अफसरशाही को गंभीर रोगों से ग्रस्त लोगों को दिया जा रहा ‘सहारा’ अखर रहा है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 9 फरवरी, 2019 के अपने बजट भाषण में 7 तरह के रोगियों के लिए हर माह 2000 रुपये सहायता देने के लिए ‘सहारा’ योजना घोषित की थी। लेकिन जब योजना का प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग ने बनाकर वित्त विभाग को भेजा तो इस पर वित्त विभाग ने आपत्तियां लगा दी हैं। कहा गया है कि इस तरह यदि योजना को लागू किया गया तो हर साल 48 करोड़ का खर्चा सरकार पर आ जाएगा।

इसलिए इसे केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों तक ही सीमित रखा जाए। इस आपत्ति के कारण ये स्कीम अब कैबिनेट में जाने से अटक गई है। ये सातों रोग ऐसे हैं कि यदि एक बार इन्सान को लग जाए तो मौत के बार ही पीछा छूटता है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस मंशा से ये योजना घोषित की थी कि इन रोगियों निरंतर देखभाल की जरूरत होती है। इसलिए इनको वित्तीय सहायता सरकार देगी ताकि ये परिवार पर खुद को बोझ के रूप में न देंखे। अब यदि मुख्यमंत्री वित्त विभाग की आपत्तियों को देखेंगे तो ये सहारा उस रूप में नहीं मिल पाएगा, जिस रूप में इसे देने की मंशा सरकार की है।

इन 7 रोगों के मरीजों को मिलेगी मदद

मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार कैंसर, पार्किसंस, पैरालिसिस, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफिलिया, थैलेसीमिया और रेनल फेल्योर यानी किडनी से संबंधित रोगियों को सहारा योजना के तहत प्रति माह 2000 रुपये मिलने हैं।

20 हजार रोगी, 48 करोड़ रुपये सालाना खर्चा

इस योजना को लागू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी सीएमओ से डाटा एकत्र कर ड्राफ्ट बनाया। प्रदेश में अभी इन सात रोगों के करीब 20,000 रोगी हैं। इन पर प्रति माह 2 करोड़ और सालाना 48 करोड़ खर्चा आंका गया है।

कैसे तय होंगे आर्थिक रूप से कमजोर?

अब वित्त विभाग की आपत्ति के बाद यदि केवल आर्थिक रूप से कमजोर रोगियों को ये सहारा देंगे, तो इनका चयन कैसे होगा? क्योंकि इसका कोई आधार अभी सरकारी सिस्टम में नहीं है, सिवाए जनरल कोटा आरक्षण के लिए तय 4 लाख आय सीमा को छोड़कर।

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