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लोगों के घर में रुके देवता लोगों को दे रहे हैं आशीर्वाद

ललित ठाकुर। पधर
चौहार घाटी से लगभग दस देवता मंडी शिवरात्री को शरीक होने निकल चुके हैं, लेकिन इन देवताओं की एक खास बात है कि ये चौहारघाटी से अपने देवलुओं के साथ लगभग 100 किलोमीटर का पैदल सफ र मंडी पहुंचते है। बताया जाता है कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है । जब भी चौहारघाटी के देवता शिवरात्रि के अलावा अपने सेवादारों के घर पर सरीक होने भी पैदल ही निकलते हैं। ये देवता शिवरात्री में शरीक होने के लिए कई दिन पहले ही निकल पड़ते हैं, क्योंकि 100 से ज्यादा किलोमीटर पैदल सफ र कर मंडी में शिवरात्रि को पहुंचते हैं।

वहीं लोगों के घर रुके देवता लोगों को आशीर्वाद दे रहे हैं। चौहारघाटी के नारायण देव , बजीर के नाम से विख्यात देव पशाकोट, तरेलु गहरी , दरुण गहरी , सहित सभी देवता पैदल ही मंगलवार शाम को मंडी माधोराय मंदिर में मंडलू पूजन के साथ शिवरात्रि का आगाज करेंगे। शिवरात्रि खत्म होते ही सभी देवता मंडी से वापस भी पैदल ही अपने मंदिरों में पहुंचते है और जगह -जगह लोग उनका स्वागत करते है और देवलुओं के लिए लोगों द्वारा धाम का आयोजन भी किया जाता है।

बताते है कि जिस भी श्रद्धालु की कोई भी मन्नत पूरी हो जाने पर देवता उनको आशीर्वाद देने के लिए उनके घर भी पधारते है। इसी प्रकार सभी देवता मंडी में पहुंच जाएंगें जिससे मंडी शिवरात्री का आगाज शुरू हो जाएगा। इसी बीच शिवरात्री के दौरान लोग देवता को अपने घर पर भी बुलाते है ।

शिवरात्रि महोत्सव में होगी फोटोग्राफी प्रतियोगिता

शानदार फोटोग्राफी करने वालों को प्रशासन देगा इनाम

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। मंडी
शिवरात्रि महोत्सव में इस बार देवताओं की शानदार फोटोग्राफी करने वालों को प्रशासन इनाम देगा। यह फोटोग्राफी देव संस्कृति पर ही होनी चाहिए। इसके लिए प्रशासन ने देव संस्कृति आधारित फोटोग्राफी प्रतियोगिता करवाने का निर्णय लिया है। महाशिवरात्रि महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष डीसी मंडी ऋग्वेद ठाकुर ने कहा कि मंडी के इस ऐतिहासिक महोत्सव को रोचक बनाने तथा लोक संस्कृति के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजन समिति द्वारा कई नए आयाम जोड़े जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस बार शिवरात्रि महोत्सव की विषय-वस्तु देव संस्कृति रखी गई है और इसी पर आधारित एक फोटोग्राफी प्रतियोगिता का आयोजन समिति द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रतियोगिता तीन श्रेणियों में बांटी गई है जिनमें प्रथम श्रेणी का विषय देवता के रथ और मुखौटे, दूसरी श्रेणी में देव संस्कृति के दर्शन जलेब, देवलु नाटी, वाद्य यंत्र इत्यादि तथा तीसरी श्रेणी का विषय शिवरात्रि महोत्सव का सर्वश्रेष्ठ फोटोग्राफ रखा गया है।

उन्होंने कहा कि इन तीनों श्रेणियों में कोई भी व्यक्ति अधिकतम तीन छायाचित्र प्रति श्रेणी प्रेषित कर सकता है। यह छायाचित्र 13 फ रवरी से 21 फ रवरी के मध्य खींचे गए हों और उच्च गुणवत्ता के व मौलिक होने चाहिए। छायाचित्र का साईज 25 एमबी मेगा बाईट से अधिक नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक श्रेणी में विजेताओं को नकद पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।

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