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सैकड़ों हारियान और कारकून बनेंगे ऐतिहासिक क्षण के गवाह

सैकड़ों हारियानों के साथ श्रीजोगणी माता शक्तिपीठ को रवाना हुए देवता

मोहन लाल ठाकुर । बंजार
बंजार उपमंडल के जिभी घाटी की दो खाड़ागाढ़ व तिलोकपुर कोठियों के अधिष्ठाता देवता गढ़पति मूल शेषनाग के नए देवरथ की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। रविवार को दर्जनों वाद्य यंत्रों की कलरव ध्वनि व सैकड़ों हारियानों व कारकूनों के लाव लश्कर के साथ ऐतिहासिक श्रीजोगणी माता शक्तिपीठ में अर्जित शक्तियों की स्थापना करने के लिए रवाना हुए। रविवार शाम को नराहां व आज सोमवार को भूमियां पहुंचेगे और कल सोमवार को बाहू के ऐतिहासिक श्रीजोगणी माता मंदिर में अर्जित शक्तियों की स्थापना करेंगे।

अब नए देवरथ में आठ के बजाए नौ मोहरे होंगे

शेषनाग के नए देवरथ में इस बार ऐतिहासिक कुल्लू के राजा द्वारा शताब्दियों पूर्व भेंट किया गया चांदी का मोहरा लगाया गया। जिसे कुछ दशकों पूर्व रथ से उतारा गया था तथा इसके स्थान पर अस्सी के दशक में सोने का मोहरा लगाया गया था। इस चांदी के मोहरे को देवरथ में चढ़ाने से कयास लगाए जा रहे थे कि अब नए देवरथ में आठ के बजाए नौ मोहरे होंगे। लेकिन हारियानों ने इस रथ से एक सोने के मोहरे को उतारकर इस की जगह इस चांदी के मोहरे को लगाया।

जिससे अब नए देवरथ में भी पुराने रथ की तरह आठ मोहरे ही लगे हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 21 दिसंबर 1973 को गढ़पति मूल शेषनाग जिभी का देवरथ बना था व इसकी प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। अब 44 वर्ष बाद उनके नए देवरथ का निर्माण कार्य 6 दिसंबर से आरंभ किया गया था व 8 दिनों में कुशल कारीगरों के द्वारा अंगाह की लकड़ी व तांबे की धातु से इसका निर्माण कार्य पूर्ण करके 14 दिसंबर को नए देवरथ का प्राण प्रतिष्ठा समारोह उनकी तपोस्थली जिभी मंदिर में आयोजित की गई। इस प्रतिष्ठा समारोह के तीसरे दिन परंपरानुसार शेषनाग अपने नए देवरथ पर विराजमान होकर अपने बाहू दौरे पर रवाना हुए जहां बे श्रीजोगणी माता मंदिर बाहू में अर्जित शक्तियों की स्थापना करेंगे।

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