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अब अनसेफ ढांचा बना जानमाल के लिए खतरा

प्रशासन की कार्रवाई से शहर में हड़कंप, जेसीबी चलाकर चार बजे तक गिराया ढांचा, शाम होते-होते दोबारा कब्जे की कोशिश

रविंद्र चंदेल। हमीरपुर
हमीरपुर शहर के बीचोंबीच करोड़ों की बेशकीमती सरकारी भूमि पर वर्षों से कब्जा जमाए धनासेठों से सरकार की अमानत को छुड़ाने की हिम्मत जिला प्रशासन ने पहली बार दिखाई है। यह पहली बार हुआ है कि अतिक्रमण माफिया के कहर से आम जनता व सरकारी संपत्ति को छुड़ाने का प्रयास किया गया है। यह दीगर है कि शहर के बीचोंबीच अतिक्रमण माफिया के भारी दबाव के बावजूद प्रशासन की कार्रवाई चार बजे के करीब न्यायालय के स्टे आर्डर का शपथ पत्र देने के बाद प्रशासन को विवशता में रोकनी पड़ी है।

हालांकि संबंधित पार्टी ने प्रशासन को स्टे ऑर्डर न देकर स्टे होने का शपथ पत्र ही दिया है और उसी एफिडेविट के आधार पर प्रशासन न्यायालय का सम्मान करते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई रोक दी है। सरकारी भूमि पर बनी इमारत पर कब्जा जमाने वालों को प्रशासन कई बार दुकानों को खाली करने के चेतावनी नोटिस दिए थे, लेकिन बावजूद इसके प्रशासन के नोटिसों से बेखौफ दुकानदार डटे रहे।

अंतत: शुक्रवार को प्रशासन ने तहसीलदार मित्रदेव व एसएचओ जगदीश चंद की अध्यक्षता में अतिक्रमण हटाने के लिए गठित की गई टीम को लेकर जेसीबी के साथ मौके पर पहुंचे और अतिक्रमण की गई ईमारत को तोडऩे की कार्रवाई शुरू कर दी, लेकिन कुछ देर बाद ही न्यायालय के स्टे ऑर्डर का शपथ पत्र मिलने के बाद प्रशासन को यह काम रोकना पड़ा। बहरहाल प्रशासन की इस कार्रवाई से शहर में बेखौफ सरकारी भूमि पर वर्षों से कब्जा जमाए अतिक्रमणकारियों के हाथ पांव फूले हैं। वहीं शहर के आम नागरिकों व व्यवसायियों ने प्रशासन के इस कदम का स्वागत किया है। हमीरपुर शहर में सरकारी भूमि पर कब्जा करने का यह पहला मामला नहीं है।

शिक्षा विभाग की 47 कनाल सरकारी भूमि में से कुछ कनाल पर खेल मैदान है

अन्य भी दर्जनों लोगों ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया हुआ है। जानकारी यह है कि 47 कनाल सरकारी भूमि पर शहर के बीचोंबीच शिक्षा विभाग की मालकीयत दर्ज है। इस भूमि का एक सिरा सब्जी मंडी के साथ लिंक रोड को छूता है तो दूसरा सिरा मालरोड के आगे तक आता है। हाल ही में प्रशासन द्वारा करवाई गई निशानदेही में इसका खुलासा हुआ था। इस बेशकीमती सरकारी भूमि की कीमत करोड़ों रुपये है। यही कारण है कि आसानी से उपलब्ध इस सरकारी भूमि पर रसूखदार लोगों ने कब्जा जमाया है।

जिस कारण से शहर के अवैध अतिक्रमणकारी सरमायेदार इस भूमि की निशानदेही न होने में अरसे से अपने रसूख प्रभाव का इस्तेमाल करते रहे हैं। शिक्षा विभाग की 47 कनाल सरकारी भूमि में से कुछ कनाल पर खेल मैदान है, जबकि 21 कनाल भूमि पर स्कूल का कब्जा बताया जाता है। 47 कनाल के रकबे में से करीब 27 कनाल भूमि पर ही सरकारी कब्जा है, जबकि करीब 20 कनाल भूमि पर अवैध कब्जा होने की तस्वीर मौका पर सामने आती है। जिस पर शहर के अतिक्रमणकारी अतिक्रमण की मुहिम को बढ़ावा दे रहे हैं।

स्टे ऑर्डर का एफिडेविट मिलने पर रोकी कार्रवाई

जिस भूमि पर से अवैध कब्जा हटाने की मुहिम शुरू की गई थी। उस भूमि पर न्यायालय का स्टे ऑर्डर का एफिडेविट मिलने के कारण कार्रवाई रोकी गई है, लेकिन यह ढांचा अब पूरी तरह से अनसेफ हो चुका है। प्रशासन ने यहां अनसेफ का चेतावनी बोर्ड भी लगाया है। फिर भी हमीरपुर के अवाम व स्कूल प्रशासन से आग्रह है कि यहां से गुजरते समय पूरी एहतियात बरतें। प्रशासन इस मामले पर आगामी कार्रवाई पर विचार कर रहा है। लोगों की जानमाल से कतई समझौता नहीं किया जा सकता है।

शाम होते ही फिर शुरू हो गया षड्यंत्र

हमीरपुर शहर में भारी मशक्कत के बाद जिस सरकारी भूमि पर से जेसीबी मशीनों के माध्यम से अवैध कब्जा हटाने का प्रयास प्रशासन ने किया शाम चार बजे उसी भूमि पर एफिडेविट देने के बाद प्रशासन को कार्रवाई रोकनी पड़ी है। प्रशासन की कार्रवाई रोकने के बाद हालांकि यह ईमारत पूरी तरह से अनसेफ हो चुकी थी।

जिसका बोर्ड जिला प्रशासन ने गिराये जाने वाले ढांचे पर टांग दिया था, लेकिन स्टे ऑर्डर का शपथपत्र होने की आड़ में शाम होते होते उस जमीन पर फिर से काम शुरू कर दिया गया। हालांकि इस अनसेफ ढांचे से अब मालरोड पर चलने वालों को ही खतरा नहीं है, बल्कि इसके ठीक सामने स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को भी भवन से खतरा बना हुआ है।

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